मक्खनलाल स्कूल की छत गिरने से पढ़ाई से वंचित हुए स्टूडेंट्स को जल्द ही आसपास के स्कूलों में दाखिला दिलाया जाएगा।
खास बात यह है कि इन बच्चों से न तो प्रमाणपत्र और न ही कोई एडमिशन फीस ली जाएगी। ड्रेस और किताबों के लिए भी इन बच्चों पर कोई दबाव नहीं डाला जाएगा।
शिक्षा विभाग की टीम ने शुक्रवार को पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर यह आश्वासन दिए। बीते शुक्रवार को कास्थवाड़ा स्थित मक्खनलाल स्कूल के जर्जर हॉल की छत गिरने से मलबे में दबकर एक बच्ची की मौत हो गई थी और दो दर्जन से अधिक बच्चे घायल हो गए थे।
इसके बाद प्रशासन ने स्कूल बंद करा दिया था। स्कूल बंद होने के कारण इसमें अध्ययनरत बच्चों की पढ़ाई ठप हो गई। सीडीओ के निर्देश पर शुक्रवार को शिक्षा विभाग के डॉ. इरफान, अंबुज कुमार, पवन कुमार, इकबाल अहमद, मसूद आलम, शफीकुल हसन ने मक्खनलाल में पढ़ने वाले बच्चों के परिजनों से मुलाकात की।
टीम के सदस्यों ने परिजनों से उनके बच्चों का आसपास के स्कूल में एडमिशन कराने का आग्रह किया। बताया कि नए स्कूल में एडमिशन कराने पर कोई एडमिशन फीस नहीं ली जाएगी, न ही टीसी या अन्य प्रमाणपत्र मांगे जाएंगे।
परिजनों को स्कूल की जो फीस होगी वही जनवरी माह से देनी होगी। सदस्यों ने बताया कि नया स्कूल बच्चों को ड्रेस और किताबों के लिए बाध्य नहीं करेगा।
टीम सदस्यों ने मक्खनलाल स्कूल के स्टाफ पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। सर्वे टीम के सदस्यों का कहना था यदि स्कूल से उन्हें सभी बच्चों का विवरण उपलब्ध करा दिया जाता तो वह परिजनों से सीधे संपर्क कर उनके बच्चों का आसपास के स्कूलों में एडमिशन करवा देते।
सर्वे के दौरान कई परिजनों ने बताया कि उनके बच्चे नवीं, दसवीं कक्षा में पढ़ते थे। जबकि स्कूल की मान्यता जूनियर हाईस्कूल तक ही है।