पिछले एक महीने से जिला अस्पताल और अलीगढ़ में उपचार करा रहा छह वर्षीय हारिश आखिरकार कुपोषण से जंग हार गया। रविवार रात बिघेपुर स्थित अपने घर में उसने दम तोड़ दिया।
जिला अस्पताल से अलीगढ़ स्थित कुपोषण केंद्र रेफर करने के बाद आर्थिक तंगी के चलते मां नगीना हारिश का इलाज नहीं करा सकीं। दो बेटों की पहले ही कुपोषण से मौत होने के बाद हारिश की मौत से नगीना पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
बता दें कि मामला संज्ञान में आने के बाद डीएम ने हारिश को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। चोला क्षेत्र के गांव बिघेपुर निवासी नगीना का आठ वर्षीय पुत्र हारिश अतिकुपोषण से पीड़ित था।
अक्तूबर माह में डीएम बी. चंद्रकला के निर्देश पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। करीब 20 दिन जिला अस्पताल में उपचार के बाद उसे अलीगढ़ स्थित कुपोषण केंद्र रैफर कर दिया गया।
लेकिन अलीगढ़ आने-जाने का खर्चा नगीना नहीं उठा सकी। जिला अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा ये हुआ कि नगीना अपने बच्चे को लेकर गांव में ही जूझती रही।
सही उपचार नहीं मिल पाने के कारण हारिश ने रविवार रात दम तोड़ दिया। इससे पहले हारिश के दो भाइयों की भी कुपोषण के चलते मौत हो चुकी है। जिलाधिकारी बी. चंद्रकला ने हारिश की मौत पर दुख जताया और जांच के निर्देश दिए हैं।
बेटे का इलाज नहीं करा पाई मां
बुलंदशहर। बच्चों में कुपोषण जैसी गंभीर बीमारी और पति की बेरुखी ने नगीना को आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया। एक-एक पैसे को मोहताज नगीना को प्रशासन की तरफ से भी आर्थिक मदद भी नहीं मिली।
जबकि प्रशासनिक अधिकारियों ने नगीना को आर्थिक मदद का आश्वासन दिया था। कुपोषण से जूझ रहे हारिश के प्रति स्वास्थ्य अफसरों का रवैया उदासीन बना रहा।
हारिश को बेशक जिला अस्पताल में भर्ती कर दिया गया हो, लेकिन उसका उपचार उस तरीके से नहीं किया, जिसकी उसे जरूरत थी। हारिश को उपचार के लिए अलीगढ़ रेफर कर दिया गया।
एक दिन अलीगढ़ जाने के बाद एक-एक रुपये को मोहताज नगीना अपने बच्चे को दोबारा अलीगढ़ लेकर जाने में विफल रहीं।
गर्भवती है हारिश की मां नगीना
हारिश की मां नगीना अब भी नौ माह के गर्भ से है। कभी भी नगीना को प्रसव हो सकता है। ऐसे में तीन बेटे को गंवा चुकी नगीना पर प्रसव से पहले यह हादसा मुसीबत बनकर टूटा है।
झूठे हैं जनपद में कुपोषण के आंकड़े
जनपद में कुपोषण पर बाल विकास एंव पुष्टाहार विभाग के आंकड़े पूरी तरह झूठे हैं। विभाग द्वारा जिले में न तो कुपोषण से मौत का सच सामने लाया जाता है और न ही कुपोषण के सटीक आंकड़े विभाग के पास होते हैं। विभागीय अधिकारी कुपोषण पर हवा-हवाई दावे करते हैं।
हारिश को गंभीर कुपोषण के चपेट में था। इसका उपचार जिला अस्पताल में संभव नहीं था। उसे अलीगढ़ मेडिकल सेंटर रेफर किया गया था। हारिश का वजन भी जिला अस्पताल में उपचार के दौरान बढ़ गया था। हारिश की हालत नाजुक थी। इसलिए उसे मेडिकल सेंटर भेजा गया। हारिश की मां इसके लिए तैयार थी। उन्होंने खुद इसका उपचार अलीगढ़ में कराने की बात कही थी। - डॉ. डीके सिंघल, सीएमएस
कुपोषण से जूझ रहे हारिश की मौत से दुख पहुंचा है। पूरे मामले की जांच की जाएगी कि हारिश को जिला अस्पताल से किस परिस्थिति में रेफर किया गया। हारिश की मां से संपर्क किया जा रहा है। उन्हें आर्थिक मदद दिलाई जाएगी। - बी. चंद्रकला, जिलाधिकारी