गांवों में होने वाले सरकारी कामों की कमान अब ‘चैंपियन’ के हाथ में होगी। वह शौचालय निर्माण की स्थिति पर नजर रखेंगे। साथ ही पात्रों की सही पहचान अधिकारियों को बताएंगे। इतना ही नहीं मतदान को जागरूक करने के साथ ग्रामीणों को सरकारी येाजनाओं से अवगत करवाएंगे।
डीपीआरओ के अनुसार जिले के सभी 951 गांवों में चैंपियन नियुक्त हो गए हैं। जल्द ही ट्रेेनिंग देकर इनको जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। बता दें कि जिले में नमामि गंगे और अन्य सरकारी योजना के तहत गांवों में शौचालयों निर्माण का कार्य चल रहा है। इसके अलावा अन्य विकास कार्य भी हो रहे हैं।
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए पात्रों का चयन करने में अफसर कई बार चूक जाते हैं और अपात्र लोग इसका फायदा उठा जाते हैं। मगर, अब सभी 951 गांवों में ‘चैंपियन’ नियुक्त किए जा रहे हैं। यह चैंपियन गांव का वह युवा चुना गया है, जो शिक्षित हो और उसके पास मोबाइल हो।
जिस युवक को चैंपियन बनाया गया है। वह शौचालयों के निर्माण के साथ पात्रों की पहचान बताएगा। इसके साथ ही वह वोटरों को जागरूक करेगा और ग्रामीणों को अफसरों से संपर्क साधकर सरकारी योजनाओं की जानकारी देगा। उसकी जिम्मेदारी यह भी होगी कि वह दिव्यांग और वृद्धों को चुनाव के लिए मतदान केंद्र तक लेकर पहुंचे।
चैंपियन को ट्रेनिंग देने के बाद प्रशासन की ओर से एक पहचान पत्र भी दिया जाएगा। जिससे उसकी पहचान हो सकेगी। इस चैंपियन के पंचायती राज विभाग के साथ अन्य विभागों के अफसर भी संपर्क में रहेंगे। जिससे गांव में चल रहे कार्यों का समय-समय पर जायजा लिया जाता रहे।
गांव में शौचालय निर्माण पर नजर रखने और पात्रों की पहचान बताने के साथ ही विकास कार्यों की स्थिति की जानकारी देने के लिए जिले के सभी 951 गांवों में चैंपियन नियुक्त किए जा रहे हैं। वह मतदान के लिए भी जागरूक करेंगे। इनका चयन कर लिया है और जल्द ही ट्रेनिंग देने के बाद पहचान पत्र सौंपकर जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी।
- राजेश कुमार, डीपीआरओ।