बार-बार बदल रही मौसम की रंगत ने आंकड़े भी फेल कर दिए है। पूर्वानुमान के उलट मंगलवार सुबह की शुरूआत सर्द हवाओं से हुई और पूरा दिन शीतलहर चलती रही। कभी धूप कभी छांव के बीच दिन पूरा हुआ। बता दें पिछले कई दिन से हल्की बदली है। मंगलवार सुबह से चल रही सर्द हवाओं ने लोगों को घरों में कैद कर दिया है।
ड्यूटी पर जाने वाले दैनिक यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। मंगलवार का अधिकतम तापमान 18 और न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बुधवार को अधिकतम तापमान 21 और न्यूनतम 8 व बृहस्पतिवार को अधिकतम 22 और न्यूनतम 7 डिग्री रहने की संभावना है।
मौसम कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ. विवेकराज का कहना है कि मौसम बार-बार रंगत बदल रहा है। सर्द हवाओं के चलते मौसम ठंडा रहा। बारिश की संभावना नहीं है जल्द पारा बढ़ेगा।
व्यापार पर पड़ा प्रतिकूल प्रभाव
पिछले दो दिनों से सर्द हवा के साथ मंगलवार को बादल निकलने के चलते सर्दी और बढ़ गई। सर्दी बढ़ने से व्यापार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। मंगलवार को पूरे दिन धूप नहीं निकली। हल्की सर्द हवा चलती रही और पूरे दिन घटा के चलते दिन काफी ठंडा रहा। इसका असर व्यापार पर भी देखने को मिला। सर्दी में ग्राहकों के बाजार में नहीं आने के कारण बाजार सूने रहे।
व्यापारी भी सर्दी से बचने के लिए दुकानों के आगे अलाव जलाकर सर्दी से बचते नजर आए। मुकेश गर्ग, कपिल गोयल, संदीप सिंघल आदि व्यापारियों ने बताया कि नोटबंदी से बाजार पहले से ही ठंडा था। मंगलवार को सर्दी के चलते बिक्री काफी कम रही है।
गलन भरी ठंड ने निकाला आलू का दम
बर्फबारी के बाद गलनभरी ठंड से गिरे पारे ने आलू उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। आलू की फसल पर ठंड का प्रकोप पीलापन के रूप में नजर आ रहा है। ठंड से फसल को बचाने के लिए किसान कीटनाशकों के साथ सिंचाई कर रहे हैं। आलू उत्पादन में जहांगीराबाद क्षेत्र का आसपास के जिलों में खासा नाम है।
किसान हर वर्ष रकबा भी बढ़ा रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से ठंड ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। फसल में पाला गिरने से आलू की पत्तियां झुलस गई हैं। चुर्री (ब्लाइट) रोग ने भी फसल को अपनी गिरफ्त में ले लिया है।
किसान राकेश खदाना, गिरीश इंधियार, अरविंद अहार व अशोक शर्मा गांव फरीदा बांगर का कहना है कि पिछले दिनों से पड़ रही ठंड का असर आलू की फसल पर दिखाई दिया है, जिससे आलू के पत्ते झुलस गए हैं और चुर्री आने से पीले पड़ने लगे हैं। उत्पादन कम होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।