बुलंदशहर। जिले के दो मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल से मृतक का प्रशिक्षण प्रमाण पत्र जारी करने का मामला सामने आया है। जो ई-रिक्शा डीलर के यहां से आवेदन किए गए। जबकि युवक की सड़क हादसे में मार्च 2025 को मौत हो गई और अगस्त व सितंबर माह में प्रमाण पत्र को आवेदन किए गए। एआरटीओ प्रशासन का कहना है कि मामला उनके कार्यालय का नहीं है, फिर भी मामले की जांच कराई जाएगी।
ई-रिक्शा के पंजीकरण के लिए आरटीओ कार्यालय में फॉर्म 20, 21 और 22 जमा करने होते हैं। सबसे पहले शोरूम से वाहन की बिक्री प्रमाण पत्र (फाॅर्म 21), रोडवर्थनेस सर्टिफिकेट (फॉर्म 22, निर्माता द्वारा) और इंश्योरेंस सर्टिफिकेट जारी होता है। इसके बाद पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू होती है।
पंजीकरण के समय ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल का प्रमाण पत्र अनिवार्य होता है। इसके लिए वैध ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड, बीमा और वाहन का तकनीकी प्रमाण पत्र अनिवार्य है। जिले में ई-रिक्शा डीलर ने पंजीकरण कराने के लिए फॉर्म 21 व 22 देकर एक मृतक के नाम पर दो ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल से प्रमाण पत्र जारी करवा लिए। जो जहांगीराबाद क्षेत्र के गांव शेखुपुर रौरा निवासी सुखवीर सिंह पुत्र विजयपाल सिंह ई-रिक्शा चालक के नाम पर बनवाए हैं। जबकि, उसकी एक मार्च 2025 को सड़क हादसे में मौत हो गई थी, जिसका जिला चिकित्सालय द्वारा 21 अप्रैल 2025 को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। लेकिन डीलर ने सुखवीर की मौत के पांच व छह माह बाद ई-रिक्शा चलाने के लिए प्रशिक्षण लेकर प्रमाण पत्र जारी करवा लिया।
डीलर द्वारा आवेदन दिए जाने पर मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल संचालक ने प्रमाण पत्र जारी कर दिए। इसके बाद मेरठ मंडल के उप परिवहन आयुक्त ने उस पर मोहर लगा दी। जानकारी लगने पर एआरटीओ प्रशासन ने जांच करवाने की बात कही है।