500-1000 के पुराने नोट से बीज और खाद खरीदने के लिए किसान (धरतीपुत्र) भटक रहे हैं। इसका कारण है कि इफको कृभको और सहकारी समितियों को पुराना नोट लेने का अधिकार शासन ने नहीं दिया है, जबकि इन संस्थानों की शाखाएं ही गांव-गांव में फैली हुई हैं। उधर, कृषि विभाग के 15 केंद्रों पर आईडी प्रूफ लेकर ही गेहूं का बीज दिया जा रहा है।
ऐसे में किसानों की परेशानी दोगुनी हो गई है। आलम यह है कि खेत का पलेवा सूख रहा है। किसानों को दोबारा पलेवा करने में खर्च करना पड़ रहा है। कई किसान बिन खाद डाले गेहूं बोने को मजबूर हैं।
रबी की बुआई का संकट गहरा गया है।
बता दें कि क्षेत्र में लगभग ढाई लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर गेहूं की फसल उगाई जाती है। नोटबंदी के चलते बुआई गत वर्ष की तुलना में काफी पीछे है। दरअसल, जनपद में किसानों को पुरानी करेंसी से गेहूं का बीज नहीं मिल रहा है।
ऐसे में किसान या तो पुराना काम चलाऊ बीज बोने को मजबूर हैं या गेहूं की बुआई नहीं करने को मजबूर हो रहे हैं। नोटबंदी से जहां बीज के अभाव में गेहूं की फसल का क्षेत्रफल कम होने की आशंका है। वहीं, बुआई में देरी होने से गेहूं का उत्पादन गिरने का खतरा पैदा हो गया है।
इफको को 1300 क्विंटल, कृभको 4,000 क्विंटल, यूपी एग्रो को 250 क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य दिया गया है। कृषि विभाग का लक्ष्य 4200 क्विंटल हैं। सिर्फ कृषि विभाग के 15 केंद्रों पर किसानों को पुरानी प्रतिबंधित करेंसी से बीज मिल रहा है।
मंडी बंद होने से लग रही करोड़ों की चपत
नोटबंदी के बाद अनाज मंडियों के बंद होने से सरकार कर करोड़ों रुपये के राजस्व की चपत लग रही है। मंडी बंद होने से व्यापारी, किसान और पल्लेदारों पर भी आर्थिक संकट गहरा गया है। मंडी व्यापारियों ने बैठक कर इस संबंध में चिंता जताई।
शुक्रवार को द गल्ला मंडी एसोसिएशन की आपात बैठक मंडी स्थित कार्यालय में हुई। बैठक में नोटबंदी के बाद मंडी बंद होने पर विचार विमर्श किया गया। बैठक में अध्यक्ष मुकुटलाल गुप्ता ने कहा कि रबी की फसल की बुआई को लेकर किसानों की समस्याएं बढ़ गई है। नोटबंदी के कारण व्यापारी वर्ग, किसान, पल्लेदार और व्यापार से जुड़े लोगों की आर्थिक स्थिति पर संकट खड़ा हो गया है।
पल्लेदार भुखमरी के कगार पर हैं। व्यापारी नेता चंद्रकांत सिंघल ने कहा कि इस समय सबसे बड़ी समस्या पैसे की निकासी की है। किसानों से जुड़े व्यापारी को रोजाना पांच लाख रुपये निकालने की छूट होनी चाहिए।
बैठक में मुकेश अग्रवाल, रविशंकर लोधी, ब्रज बिहारी अग्रवाल, मनोज कुमार, सौरभ, जितेन्द्र नारायण, राकेश कुमार, अतुल कुमार, ब्रज फौजी, संजय सिंघल, ऋषिपाल, इरफान, नीरज तायल, अनिल कुमार आदि रहे।
इफको, कृभको, यूपी एग्रो और सहकारी समितियों पर पुराना 500 रुपये लेने का अधिकार नहीं दिया गया है। इसलिए पूरा नोट नहीं लिया जा रहा है। - अशोक यादव, एआर, कोऑपरेटिव
कैश नहीं मिलने पर एसबीआई के बाहर हंगामा
कैश नहीं मिलने पर शुक्रवार को एसबीआई की मुख्य शाखा के बाहर लोगों ने जमकर हंगामा किया। हालात बिगड़ते देख सुरक्षाकर्मियों ने बैंक के दोनों गेट बंद कर दिए तो लोगों का गुस्सा और भड़क गया। उन्होंने गेट के बारे केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
एसबीआई की मोतीबाग शाखा पर सुबह 10 बजे से पहले ही कतार लग गई थी। आरोप है कि सुबह से दोपहर साढ़े 12 बजे तक कैश बांटा गया, लेकिन बाद में बैंककर्मी कोई न कोई खामी बताकर ग्राहकों को लौटाने लगे। इससे लोगों का गुस्सा भड़क गया। लोगो का आरोप था कि शादी के लिए भी पैसा नहीं दिए जा रहे हैं।
सचिन ने बताया कि दो दिन बाद उनकी बहन की शादी है। आरबीआई की गाइडलाइन के हिसाब से सभी शर्त पूरी करने के बाद भी बैंक की ओर से उसे पैसा नहीं दिया जा रहा है। हंगामे के बीच पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को शांत कराया। इस मौके पर सुनील, सतबीर, मुजीब, हरवीर, सचिन, कुंदन, वैभव, सुनील आदि।
कैश नहीं आने पर फूटा गुस्सा, लगाया जाम
कबाड़ी बाजार चौराहे के पास स्थित ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्श में कैश नहीं आने से गुस्साए लोगों ने हंगामा कर चौराहे पर जाम लगा दिया। इससे वाहनों का आवागमन अवरुद्ध हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह लोगों को समझाकर शांत कराया तो आधे घंटे बाद यातायात सुचारु हो पाया।
कबाड़ी बाजार चौराहा स्थित ओरियंटल बैंक की शाखा के बाहर कैश लेने के लिए सुबह से ही लोगों की कतार लगी थी। करीब 9.30 बजे बैंक पहुंचे कर्मचारियों ने कैश न होने की बात कही। इससे लोगों का गुस्सा भड़क गया। लोगों ने हंगामा करना शुरू कर दिया और बैंक नहीं खुलने दिया। इसके बाद लोग कबाड़ी बाजार चौराहे पर पहुंच गए और जाम लगा दिया।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह लोगों को समझा-बुझा कर शांत कराकर बैंक खुलवाया। वहीं, जंक्शन स्थित पीएनबी बैंक पर भी कैश न होने से लोगों ने जमकर हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को शांत कराया।
12 बजे तक नहीं खुला बैंक, हंगामा
खानपुर थाना क्षेत्र के जाड़ौल गांव में शुक्रवार को ओबीसी बैंक के नहीं खुलने से गुस्साए ग्रामीणों ने बैंक प्रबंधक के खिलाफ नारेबाजी की। बैंक मैनेजर अपने स्टाफ के साथ 12 बजे तक एक मकान में बैठे रहे। बाद में उच्चधिकारियों ने फोन किया तो बैंक खोला।
औरंगाबाद जहांगीराबाद रोड स्थित जाड़ौल के ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स में शुक्रवार तड़के लोग लाइन में लग गए थे। करीब 10 बजे बैंक मैनेजर स्टाफ के साथ पहुंचे तो लोगों के गुस्से को देख मैनेजर ने बैंक खुलवाने की हिम्मत नहीं जुटाई और पड़ोस के एक मकान में जाकर बैठ गए।
बैंक न खुलने पर गुस्साए लोगों ने हंगामा कर दिया। किसी ने डीएम और एसडीएम स्याना हिमांशु गुप्ता को जानकारी दी। डीएम ने ओबीसी के रीजनल मैनेजर से बात कर तत्काल बैंक खुलवाने के निर्देश दिए। बाद में रीजनल मैनेजर ने मैनेजर को फोन फटकार लगाई। जिसके बाद साढ़े 12 बजे बैंक खुला।