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स्याना हिंसा: छह साल, सात माह और 29 दिन... हत्यारों और दंगाइयों को अधिकतम सजा दिलाने में नाकाम रहा अभियोजन

Sat, 02 Aug 2025 02:42 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बुलंदशहर

सार

बुलंदशहर के स्याना हिंसा मामले में छह साल सात माह 29 दिन बाद एडीजे 12 गोपाल जी के न्यायालय ने शुक्रवार को इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या के पांच दोषियों को आजीवन कारावास व 32-32 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है। जबकि, पूर्व जिला संयोजक बजरंग दल व जिला पंचायत सदस्य योगेश राज, भाजपा के मंडल अध्यक्ष सचिन अहलावत, प्रधान लौंगा सतेंद्र समेत 33 दोषियों को जानलेवा हमले, बलवा, 7 क्रिमिनल लाॅ अमेंडमेंट अधिनियम, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत आईपीसी की 14 धाराओं में अधिकतम सात-सात वर्ष का कारावास व करीब 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है। हत्या के मामले में एक बाल अपचारी की पत्रावली बाल न्यायालय में पृथक चल रही है।
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Bulandshahr Siyana Violence - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छह साल, सात माह और 29 दिन यानि करीब 2431 दिन का लंबा समय। सरकार की प्राथमिकता वाला मुकदमा। 400 से अधिक तारीखें हुईं लेकिन अभियोजन इंस्पेक्टर की हत्या करने वाले दोषियों और बलवा, आगजनी व जानलेवा हमला जैसे संगीन मामले के दोषियों को अधिकतम सजा दिलाने में नाकाम रहा। 
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अभियोजन ने न्यायालय से दोषियों को अधिकतम सजा देने की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने न्यूनतम सजा की मांग की। शुक्रवार शाम को आदेश आया तो उसमें सभी धाराओं में अभियुक्तों को उनकी न्यूनतम सजा का आदेश आया। कानून विशेषज्ञों का भी कहना है कि अभियोजन की ढिलाई की वजह से दोषियों को न्यूनतम सजा ही मिल सकी।

तीन दिसंबर 2018 को स्याना की चिंगरावठी चौकी पर हुए हमले की गूंज लखनऊ और दिल्ली के राजनैतिक गलियारों तक पहुंची थी। मामला गोवंश कटान के बाद हुए प्रदर्शन के दौरान बलवा और उसमें इंस्पेक्टर समेत दो लोगों की हत्या का था। काफी हंगामा भी हुआ था। 
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सरकार ने इस प्रकरण को प्राथमिकता पर लेते हुए एसआईटी का गठन किया और अपने तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी प्रभाकर चौधरी को बुलंदशहर का एसएसपी बनाकर भेजा था। 

आरोपियों के जमानत पर छूटने के बाद उन पर राजद्रोह यानि आईपीसी की धारा 124 ए लगाई गई और इंस्पेक्टर की हत्या के आरोपी बनाए गए प्रशांत नट, डेविड, जॉनी, राहुल की जमानत निरस्त कर उन्हें वापस जेल भेज दिया गया था।

 

शासन से इस पूरे प्रकरण में प्रमुखता से पैरवी करने के लिए स्पेशल काउंसिल की नियुक्ति की गई थी और सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की करीब दो वर्ष पूर्व दिन प्रतिदिन सुनवाई के आदेश जारी हुए थे। एसपी स्तर के अधिकारी इस पूरे मामले की माॅनिटरिंग करते रहे। 

 

करीब साढ़े छह साल से अधिक के इस वक्त में इस प्रकरण में 400 से अधिक तारीखें लगीं। लोगों को उम्मीद थी कि अभियुक्तों को अधिक से अधिक सजा सुनाई जाएगी लेकिन पुलिस की कमजोर विवेचना और अभियोजन की मजबूत पैरवी न होने से अभियुक्तों को उन पर लगाई गई आईपीसी की धाराओं में अधिकतम सजा नहीं हो सकी।

पहली बार ऐसा हुआ कि कमजोर तथ्यों के चलते एडीजे न्यायालय ने अभियुक्तों को राजद्रोह के आरोप से दोषमुक्त कर दिया। इससे पहले जिले में जिस पर भी राजद्रोह की धारा लगी थी, उसे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से ही राहत मिली थी। न्यायालय में अभियोजन ने शुक्रवार को हत्या के अभियुक्तों को अधिकतम मृत्युदंड और अन्य दोषियों को आजीवन कारावास की मांग की थी। 

 

बचाव पक्ष के सभी अधिवक्ताओं ने इस मामले में सभी दोषियों को उन पर लगे आरोपों में न्यूनतम सजा की मांग की थी। शाम को जब फैसला आया तो सभी दोषियों को उनकी न्यूनतम सजा सुनाई गई। विशेषज्ञों का कहना है कि सभी धाराओं में न्यूनतम सजा सुनाई गई है।
 

धाराएं और अधिकतम-न्यूनतम सजा
अधिवक्ता ब्रूनो भूषण ने बताया कि हत्या के अभियुक्तों को अधिकतम मृत्युदंड और न्यूनतम आजीवन कारावास तक का प्रावधान है लेकिन इस पूरे प्रकरण में हत्या में प्रयुक्त हथियार ही बरामद नहीं हो सका। यही मुख्य पहलू है। अन्य 33 पर लगाई गई आईपीसी की धारा 436, डकैती का माल बरामदगी की धारा 412 और डकैती की धारा 395 में अधिकतम सजा का प्रावधान आजीवन कारावास और न्यूनतम सात वर्ष तक है। सभी दोषियों को इन धाराओं में भी न्यूनतम सजा सुनाई गई है।

 

33 आरोपियों के सिर से धुला इंस्पेक्टर की हत्या का आरोप
स्याना हिंसा प्रकरण में चार्जशीट के दौरान पुलिस ने हत्या और हिंसा के आराोपियों को अलग-अलग रखा था। इसके बावजूद हिंसा के आरोपियों को आए दिन हत्या के मामले में भी कटाक्ष सुनने को मिलते थे। शुक्रवार शाम का सजा आने के बाद उनके परिजनों व साथियों ने कहा कि जो लोग उन्हें भी हत्या का आरोपी समझ रहे थे, अब वह दाग धुल गया है।

27 दिन बाद प्रशांत नट को बनाया था मुख्य आरोपी
हत्या के मुख्य आरोपी प्रशांत नट के अधिवक्ता रुकन सिंह पायल ने बताया कि तीन दिसंबर 2018 को जब स्याना हिंसा का मामला हुआ था तब बजरंग दल के पूर्व जिला संयोजक योगेश राज कोे मुख्य आरोपी बताया जा रहा था। 27 दिन बाद पुलिस ने अचानक प्रशांत नट को इस प्रकरण का मुख्य आरोपी बना दिया। यह कैसे हुआ, यह पूर्ण रूप से साबित अभी तक नहीं किया जा सका है।

 

करीब 49 माह से अधिक जेल में काट चुका योगेश
इस पूरे प्रकरण में दो दोषी ऐसे हैं, जो अभी तक अपनी सर्वाधिक सजा काट चुके हैं। हत्या का दोषी लोकेंद्र को आज तक कभी जमानत ही नहीं मिली, अब उसे आजीवन कारावास हुआ है। दूसरा दोषी जिला पंचायत सदस्य योगेश राज है, जो कि अब तक 49 माह से अधिक की सजा काट चुका है।
 

स्याना हिंसा: हत्या के पांच दोषियों को आजीवन और 33 को सात-सात वर्ष का कारावास
बुलंदशहर के स्याना हिंसा मामले में छह साल सात माह 29 दिन बाद एडीजे 12 गोपाल जी के न्यायालय ने शुक्रवार को इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या के पांच दोषियों को आजीवन कारावास व 32-32 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है। जबकि, पूर्व जिला संयोजक बजरंग दल व जिला पंचायत सदस्य योगेश राज, भाजपा के मंडल अध्यक्ष सचिन अहलावत, प्रधान लौंगा सतेंद्र समेत 33 दोषियों को जानलेवा हमले, बलवा, 7 क्रिमिनल लाॅ अमेंडमेंट अधिनियम, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत आईपीसी की 14 धाराओं में अधिकतम सात-सात वर्ष का कारावास व करीब 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है। हत्या के मामले में एक बाल अपचारी की पत्रावली बाल न्यायालय में पृथक चल रही है।
 

शासन की ओर से इस प्रकरण में नियुक्त किए गए स्पेशल काउंसिल अधिवक्ता यशपाल सिंह राघव ने बताया कि स्याना की चिंगरावठी चौकी के गांव महाब के जंगल में तीन दिसंबर 2018 की सुबह गोवंशों के अवशेष मिले थे। जिसके बाद हिंदूवादी बजरंगदल, विश्व हिन्दू परिषद समेत अन्य संगठन के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने गोवंशों के अवशेष एक ट्रैक्टर ट्रॉली में लादकर चिंगरावठी चौकी पर हंगामा किया था। 

 

दोपहर के समय हंगामे ने बलवे का रूप ले लिया। उग्र हुए संगठनों के कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों ने चिंगरावठी चौकी व वहां खड़े माल बरामदगी के वाहनों को आग लगा दी थी। पुलिस की ओर से भी लाठीचार्ज किया गया था। इसी बलवे में तत्कालीन स्याना कोतवाल सुबोध कुमार सिंह व गांव चिंगरावठी निवासी युवक सुमित कुमार की गोली लगने से मौत हो गई थी। जिसके बाद पुलिस ने मामले में चार दिसंबर 2018 को मामले में कई नामजद व अज्ञात आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। 

 

मामले की जांच एसआईटी का गठन कर उनको सौंप दी गई थी। बाद में पुलिस ने इस प्रकरण में 44 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। साथ ही पुलिस ने इस एफआईआर में मृतक युवक सुमित कुमार को भी आरोपी बनाया था। एसआईटी ने मामले की जांच पूरी कर आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी थी।

जिसमें पुलिस ने पांच आरोपी में से मुख्य आरोपी प्रशांत नट, डेविड, राहुल, जॉनी और लोकेंद्र उर्फ मामा को हत्या का आरोपी माना था। जबकि, पूर्व बजरंगदल जिला संयोजक व वर्तमान जिला पंचायत सदस्य योगेश राज, भाजपा बीबीनगर का मंडल अध्यक्ष सचिन अहलावत व ग्राम प्रधान लौंगा सतेंद्र समेत अन्य सभी आरोपियों पर न्यायालय ने जानलेवा हमला, डकैती, आगजनी, बलवा, धमकी देना समेत विभिन्न कुल 14 से अधिक आईपीसी की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी। साथ ही उसी दौरान सभी आरोपियों पर राजद्रोह भी लगाया गया था। 

 

मामले की सुनवाई के दौरान पांच आरोपी चंद्रपाल, अजय दीवला उर्फ दीवला, कुलदीप, आशीष उर्फ छोटे व ओमेंद्र की मृत्यु हो गई। जबकि, एक आरोपी की पत्रावली बाल न्यायालय में पृथक कर दी गई। जो कि अभी तक विचाराधीन है। पूरे प्रकरण में गत बुधवार को सभी आरोपियों को न्यायालय ने स्याना हिंसा कांड में दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया था।
 

साथ ही शुक्रवार को मामले मे न्यायालय ने चार्जशीट के आधार पर ही दोषी प्रशांत नट, डेविड, राहुल, जॉनी और लोकेंद्र को हत्या समेत अन्य धाराओं में आजीवन कारावास व 32-32 हजार का अर्थदंड सुनाया है। साथ ही जिला पंचायत सदस्य योगेश राज, भाजपा बीबीनगर मंडल अध्यक्ष सचिन अहलावत समेत अन्य सभी अभियुक्तों को भी उन पर चार्जशीट में लगे आरोपों में दोषी मानते हुए सात-सात वर्ष का कारावास व करीब 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है।

स्याना हिंसा में इन पांच को हुआ आजीवन कारावास
1. प्रशांत नट निवासी ग्राम चिगरावटी थाना स्याना
2. राहुल निवासी ग्राम हरवानपुर थाना स्याना
3. डेविड निवासी चिंगरावटी थाना स्याना
4. लोकेन्द्र निवासी चिगरावटी थाना स्याना
5. जॉनी निवासी चिगरावटी थाना स्याना
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हिंसा, बलवा व अन्य धाराओं के 33 आरोपी, जिनका 7 वर्ष तक की सजा हुई है
1. योगेशराज निवासी गांव नयाबस थाना स्याना
2. चमन निवासी नयाबास थाना स्याना
3. देवेन्द्र निवासी नयाबास थाना स्याना
4. आशीष चौहान निवासी गांव रवानी कटीरी थाना नरसेना
5. रोहित कुमार राघव निवासी बरोली वासुदेवपुर थाना स्याना
6. जितेंद्र उर्फ लाला गुर्जर निवासी चिंगरावठी थाना स्याना
7. सोनू जाटव निवासी नयाबास थाना स्याना
8. जितेंद्र उर्फ जीतू फौजी निवासी महाव थाना स्याना
9. नितिन निवासी चिंगरावठी थाना स्याना
10. मोहित निवासी चिंगरावठी थाना स्याना
11. रमेश जोगी निवासी चिंगरावठी थाना स्याना
12. विशाल त्यागी निवासी स्याना
13. हेमू उर्फ हेमराज निवासी चिंगरावठी थाना स्याना
14. अंकुर निवासी चिंगरावठी थाना स्याना
15. अंटी उर्फ अमित निवासी चिंगरावठी थाना स्याना
16. आशीष निवासी चिंगरावठी थाना स्याना
17. हरेंद्र निवासी महाव थाना स्याना
18. टिंकू उर्फ भूपेश निवासी महाव थाना स्याना
19. गुड्डू उर्फ मुकेश निवासी महाव थाना स्याना
20. रोबिन जाट निवासी महाव थाना स्याना
21. सत्येंद्र राजपूत निवासी गांव लौंगा थाना स्याना
22. सतीश लोधी निवासी चांदपुर थाना स्याना
23. विनीत निवासी महाव थाना स्याना
24. राजीव उर्फ कलवा निवासी चिंगरावठी थाना स्याना
25. सचिन उर्फ कोबरा निवासी हरवानपुर थाना स्याना
26. पवन कुमार निवासी स्याना
27. शिखर अग्रवाल निवासी स्याना
28. उपेंद्र राघव निवासी गिनोरा नांगली थाना खानपुर
29. सौरभ निवासी खाद मोहन नगर थाना स्याना
30. राजकुमार पूर्व प्रधान निवासी महाव थाना स्याना
31. नितिन पंडित निवासी स्याना
32. कलुआ निवासी महाव थाना स्याना
33. जयदीप निवासी ग्राम चिंगरावठी थाना स्याना
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