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उर्वरकों ने बिगाड़ी मिट्टी की सेहत, खतरे में मित्र कीट

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amar ujala - फोटो : amar ujala
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उर्वरकोें ने बिगाड़ी मिट्टी की सेहत, खतरे में मित्र कीट
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बुलंदशहर। फसलों में रासायनिक उर्वरकों का अधिक प्रयोग होने से खेत की मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा भी कम हो रही है। कीटनाशकों के प्रयोग से भी मित्र कीट भी नष्ट हो रहे हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होने का खतरा भी बढ़ गया है।
बुलंदशहर में करीब 3.65 लाख हेक्टेयर में खेती की जा जाती है। कृषि विभाग समय-समय पर किसानों के खेतों से मिट्टी लेकर उसकी लैब में जांच कराता है। मिट्टी की ताजा जांच रिपोर्ट काफी चौंकाने वाली है। रिपोर्ट बताती है कि ज्यादा रासायनिक उर्वरक का प्रयोग करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार घटती जा रही है। इससे धरती के बंजर होने का भी खतरा बढ़ने लगा है। कृषि अधिकारियों के अनुसार किसान फसल में उत्पादन बढ़ाने के लिए किसान द्वारा खेती और फसलों में रासायनिक खाद और कीटनाशक का प्रयोग अधिक किया जा रहा है। इससे जहां उर्वरा शक्ति कम होने के साथ कई जरूरी तत्व कम हो रहे हैँ। वहीं, दूसरी ओर खेत के मित्र कीट भी नष्ट हो रहे हैं। यही मित्र कीट मिट्टी में जीवांश पदार्थ का निर्माण करते हैं।
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कृषि अधिकारियों के अनुसार रासायनिक खाद से मिट्टी में नाइट्रोजन, सल्पर,पोटेशियम और सूक्ष्म तत्वों की कमी की पूर्ति की जाती है। नोइट्रोलन वातावरण में उड़ जाती है। इसे मिट्टी में रोकने के लिए जीवांश कार्बन ही प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इसके घटने से नाइट्रोजन की कमी होती है। रासायनिक खाद से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा तो बढ़ जाती है, लेकिन जीवांश कार्बन की मात्रा घटती है।
खेती के लिए खेत में जीवांश कार्बन के साथ 16 तत्वों की सबसे अधिक जरूरत होती है। इनमें कार्बन, नाइट्रोजन, मैग्नीशियम, कैल्सियम, सल्फर, पोटेशियम, आक्सीजन, हाइड्रोजन आदि शामिल होते हैं। मिट्टी में पाए जाने वाला जीवांश कार्बन वातारण की नाइट्रोजन को रोकने का काम करता है। नाइट्रोजन बढ़ने से फसल तेजी से बढ़ती है। जीवांश कार्बन मिट्टी में पाए जाने वाले जैविक तत्वों से बनता है। जबकि अधिक रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करने से मिट्टी की जांच में खुलासा हो रहा है कि जनपद की मिट्टी में उर्वरा शक्ति कमजोर होती जा रही है।
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उप कृषि निदेशक आरपी चौधरी ने बताया कि मिट्टी की जांच में खुलासा हो रहा है कि अधिक उर्वरकों का प्रयोग करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। यदि भूमि को बंजर बनाने से रोकना है तो किसानों को रासायनिक खादाें का प्रयोग कम करना होगा। किसानों को जैविक खेती की ओर से भी बढ़ना होगा। गंगा किनारे वाले गांवों में जैविक खेती की शुरूआत की गई, जिसके सार्थक परिणाम सामने आ रहे हैं। किसान पराली, हरी खाद, केंचुआ खाद और गोबर की खाद डालकर खेत की कम हो रही उर्वरा शक्ति को बचा सकते हैं।
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