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अब ड्राइंग रूम में सजा सकेंगे जंगली जानवरों के ‘मुखौटे’

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अब ड्राइंग रूम में सजा सकेंगे जंगली जानवरों के ‘मुखौटे’
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बुलंदशहर। उन लोगों के लिए एक अच्छी खबर है, जो अपने घर के ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ाने के लिए जंगली जानवरों के मुखौटे लगाने के शौकीन हैं। लेकिन यह तभी संभव होगा जब जंगली जानवरों के मुखौटे विदेश से संबंधित होंगे। विदेश से एनिमल ट्रॉफी (जंगली जानवरों के मुखौटे) लाने वाले लोगों को ही वन विभाग की ओर से अनुमति प्रदान की जाएगी। इसके लिए वन विभाग में 15 मार्च तक आवेदन करना होगा।
पूर्व के राजा-महाराजा आदि लोग घरों की दीवारों पर शेर, चीता, भालू, बारहसिंघा, हिरन आदि जंगली जानवरों की खाल और उनके मुखौटे सजाने का शौक रखते थे। लेकिन इस समय जंगली जानवरों की खाल और मुखौटे घर में सजाने पर पूरी तरह से पाबंदी है और यह गैर कानूनी भी है। पकड़े जाने पर सजा का प्रावधान है। वन्य जीव अधिनियम के तहत आरोपी को सात साल तक की सजा का प्रावधान है। लेकिन अब वन विभाग की ओर से विदेशाें से लाई गई एनिमल ट्रॉफी (जंगली जानवरों के मुखौटे) घर में लगाने की अनुमति दी जा रही है। इसके तहत विदेशों से एनिमल ट्रॉफी लाने वाले लोगों को वन विभाग के पोर्टल के साथ ही वन अधिकारियों को लिखित रूप में प्रार्थना पत्र देना होगा। इसके लिए विभाग की ओर से आवेदन करने के लिए 15 मार्च तक का समय दिया गया है।
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इनसेट=
पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही मिलेगी अनुमति
भले ही वन विभाग ने घरों की शान बढ़ाने के लिए विदेशों से लाए गए जंगली जानवरों के मुखौटे लगाने की अनुमति देने की शुरूआत की है। लेकिन इसकी अनुमति लेना भी आसान नहीं होगा, जो भी व्यक्ति विभागीय पोर्टल पर आवेदन करेगा और अधिकारियों को लिखकर प्रार्थना देगा। उसे कई तरह की जांच से भी गुजरना होगा। आवेदन होने और प्रार्थना पत्र मिलने के बाद विभाग की ओर टीम संबंधित व्यक्ति के घर जाएंगी। जंगली जानवरों के मुखौटे और खाल के बारे में पूरी जानकारी लेगी कि यह कहां से लाई गई हैं। पूरी जानकारी मिलने के बाद ही विभाग की ओर से अनुमति दी जाएगी।
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कोट =
विदेशों से लाए गए जंगली जानवरों के मुखौटे और खाल घर में लगाने के लिए विभाग की ओर से अनुमति प्रदान करने के लिए आदेश जारी किया गया है। अनुमति के लिए विभाग के पोर्टल पर पहले आवेदन करना होगा। साथ ही एक लिखित में आवेदन कार्यालय में भी देना होगा। उसके बाद पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही अनुमति प्रदान की जाएगी।
- गौतम सिंह, डीएफओ, बुलंदशहर
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