बुलंदशहर। नरौरा में श्रद्वालुओं की मौत के बाद घटना स्थल पर मृतकों के परिजन डीएम के सामने हाथ जोड़
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हे मां! अधूरी रह गई तेरी तीर्थ यात्रा
विकास वत्स
बुलंदशहर। हे मां, नियति को शायद यही मंजूर था, ऐसा तो किसी ने सोचा भी न था। कुछ घंटो पहले तो सब तीन अक्तूबर से अब तक के सुहाने सफर और दर्शनों को लेकर प्रफुल्लित थे। लेकिन, अचानक सब कुछ बदल गया। खुशी पलभर में चीत्कार में तब्दील हो गई। हे मां, तेरी यात्रा अधूरी रह गई। हमारा तो पूरा परिवार ही उजड़ गया। करूण रूदन के साथ बिलख रहे परिजन पोस्टमार्टम हाउस और घटनास्थल पर बार-बार बेहोश हो रहे थे। परिजनों की करूण वेदना और हादसे की वीभत्सता देख हर कोई उन्हें आश्वासन देने में लगा था। आंखें स्थानीय लोगों व राहगीरों की भी नम थीं।
बता दें कि गत तीन अक्तूबर को महेंद्र सिंह का पूरा परिवार व रिश्तेदार गांव मोहनपुरा, हाथरस से बस में सवार होकर नौ देवी दर्शन (हिमाचल में कांगड़ा देवी, नैना देवी, ज्वाला देवी, चामुंडा देवी, चिंतपूर्णी देवी होते हुए जम्मू में मां वैष्णो देवी से बुलंदशहर स्थित बेलोन देवी दर्शन) के लिए निकले थे। परिवार में खुशी का माहौल था। बीते दिनों पूरे परिवार ने हिमाचल और जम्मू में अधिकतर मां के तीर्थ स्थानों के दर्शन किए और अब यात्रा का अंतिम पड़ाव था। पूरा परिवार देर रात ही बस से नरौरा के गांधीघाट के निकट पहुंचा था। कुछ देर पहले बस में लोग एक-दूसरे से पूरी यात्रा के बारे में चर्चा कर रहे थे और माता रानी के जयकारे भी लगा रहे थे। लेकिन, परिवार के उन सात श्रद्धालुओं को क्या पता था बस से उतरने के बाद उनके जीवन की डोर ही टूट जाएगी। वहीं, हादसे के बाद लोगों में यह भी चर्चा थी कि श्रद्धालुओं की बस टी प्वाइंट के बिल्कुल नजदीक खड़ी थी। संभल से आई दूसरी यात्री बस चालक ने जैसे ही बस को मोड़ा होगा तो उसकी नजर जमीन पर सो रहे श्रद्धालुओं पर नहीं पड़ी होगी। चूंकि वहां थोड़ा सा ढलान है और बस की रोशनी नीचे तक नहीं पहुंची होगी। बेलोन देवी और नरौरा में गंगा स्नान से पूर्व ही परिवार में कोहराम मच गया। चार महिलाओं समेत तीन मासूमों की अर्थियां एक साथ उठ गईं। वहीं, पोस्टमार्टम हाउस पर परिजनों का कहना था कि वह पहाड़ी इलाकों में सकुशल यात्रा कर सर्व मंगला बेला भवानी के देवी दर्शन के लिए पहुंचे थे। अब बस दर्शन कर घर ही तो लौटना था। लेकिन, अब परिवार उजड़ गया और सात सदस्य काल के गाल में समा गए।