बुलंदशहर से मेरठ हाइवे को फोरलेन के लिए देश के केंद्रीय मंत्री नितिन गडगरी ने 29 सितंबर 2016 को नुमाइश मैदान पर घोषणा कर इसका शिलान्यास किया था। लेकिन तीन साल खत्म होने के बाद भी हाइवे का निर्माण पूरा नही हो सका है। बुलंदशहर से मेरठ तक के 886 करोड़ का बजट पारित किया गया था। जनपद के हिस्से में मात्र 19 किलोमीटर का ही काम आया था, जोकि अक्तूबर 2019 तक खत्म हो जाना था, लेकिन हालात देखकर एक साल का समय और लग रहा है।
दिल्ली-लखनऊ और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे के साथ ही केंद्र सरकार ने बुलंदशहर से मेरठ तक हाइवे को फोरलेन की सौगात 2016 में दी थी। जिसका शिलान्यास केंद्रीय मंत्री नितिन गडगरी ने किया था। करीब 886 करोड़ की लागत से बुलंदशहर और मेरठ के बीच हाइवे एनएच 235 को फोरलेन करने का काम भी शुरू हो गया था। जिसके चलते सड़क किनारे पेड़ों को काटकर सड़क चौड़ीकरण का काम भी ताबड़तोड़ गति से चला था। लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी बुलंदशहर से गुलावठी तक 19 किमी का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। जिसके चलते बुलंदशहर गुलावठी, हापुड़ और मेरठ जाने वालों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उधर, गुलावठी के पास बनने वाले बाईपास का निर्माण भी कछुआ गति से चल रहा है।
लांकि जिला प्रशासन और एनएचएआई के अधिकारी अक्तूबर 2019 तक गु़लावठी तक का काम पूरा होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन हालात देखते हुए उनके सभी दावों की हवा निकल गई है। भूड़ चौराहे से बराल तक अभी तक सिर्फ सिंगल रोड ही बन पाई है। वहीं, उसके आगे भी रास्ता बहुत खराब है। कहीं-कहीं तो सिर्फ रोड़ी ही पड़ी है। बारिश के मौसम में पुरानी सड़क में गड्ढे तो हो ही गए है, बल्कि हाइवे के किनारे रहने वालों के घरों तक मे पानी भर जाता है। जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कछुआ गति से चल रहा अंडरपास और बाईपास का काम
एनएचएआइ द्वारा बुलंदशहर से गुलावठी तक बनने वाले हाइवे और अंडर पास का काम कछुआ गति से चल रहा है। बाईपास का काम पूरा न होने के कारण वहां के रहने वाले लोगों का जीना मुहाल हो गया है। क्षेत्रवासी रविंद्र ने बताया कि सारा दिन धूल उड़ती रहती है। यह समझ लो कि खाने के साथ मिट्टी और रेत खाया जा रहा है। वहीं, गुलावठी से सिकंदराबाद रोड पर और हापुड़ रोड पर गांव मौड़ी के पास बन रहे अंडरपास भी आधे अधूरे ही है। जो गांव वालों के लिए परेशानी का सबब है।
किसानों के विरोध के चलते कई बार रुक चुका है काम
मुआवजा न मिलने से कई बार किसानों ने एनएच 235 का काम रुकवाया। काम धीमी गति से चलने का एक मुख्य कारण यह भी बताया जा रहा है। हालांकि जिला प्रशासन दावा कर रहा है कि 90 प्रतिशत तक मुआवजा किसानों को दे दिया गया है, लेकिन बहुत से किसान अभी भी मुआवजा न मिलने की बात कह रहे है।
बोले ग्रामीण
अभी तक कोई मुआवजा नहीं मिला है। जमीन लेते समय यह कहा गया था कि जल्द ही मुआवजा मिल जाएगा, लेकिन आज तीन साल हो गए। कई बार अधिकारियों के पास जाकर मिल चुके हैं।
लाली, निवासी अकबरपुर
अगर मुआवजा मिल जाता तो हम घर का निर्माण करा लेते। न तो जमीन का मुआवजा मिला है और न ही लेंटर तोड़ने का कोई मुआवजा दिया गया है।
बीना, निवासी अकबरपुर
हाइवे बनने में काफी देरी हो रही है। इसके चलते हालात खराब हुए पड़े हैं। दुर्घटना होने का हमेशा डर बना रहता है।
ललित, निवासी अकबरपुर
गांव में बहुत से लोग हैं जिनको अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। कई बार अधिकारियों के चक्कर लगा चुके हैं गांव वाले, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
मुकेश, निवासी अकबरपुर
जिला प्रशासन का काम केवल मुआवजा देने का है। लेकिन फिर भी 90 प्रतिशत तक से अधिक का काम पूरा हो चुका है। जल्द ही गुलावठी तक का हाईवे तैयार हो जाएगा। वहीं, मुआवजा का काम भी लगभग पूरा है, जो किसान बच गए हैं उन्हें दिया जा रहा है।
रवींद्र कुमार, एडीएम प्रशासन