59 वर्ष बाद दुर्लभ संयोग व श्रावणी नक्षत्र में पड़ रहा पहला सोमवार, जाने इसके फायदे
बुलंदशहर। सावन में सोमवार को भगवान शिव के जलाभिषेक का विशेष महत्व है। 59 वर्ष बाद श्रावणी नक्षत्र में पहली बार सोमवार पड़ रहा है। दुर्लभ संयोग को लेकर शिवभक्त तैयारियों में जुट गए हैं। वहीं, बाजारों में शिव भक्तों को रिझाने के लिए दुकानें सज चुकी हैं और खरीददारी शुरू हो गई है।
बता दें कि सावन 17 जुलाई से शुरू हो चुका है और 15 अगस्त को महीना पूरा होगा। सावन मास में सोमवार को भगवान शिव की आराधना के साथ जलाभिषेक किए जाने का विशेष महत्व माना गया है। इस दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु/ शिव भक्त सोमवार को व्रत रखकर जलाभिषेक करते हैं। जलाभिषेक के दौरान जनपद के सभी शिव मंदिरों पर शिवभक्तों की खासी भीड़ लगती है। वहीं, सुबह मंदिरों के कपाट खुलते ही अपराह्नन तक जलाभिषेक किया जाता है। जिसको लेकर नगर समेत जनपद के शिव मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। वहीं, दूसरी ओर सावन को लेकर बाजार भी भगवामय हो गए हैं। शिव भक्तों को रिझाने के लिए दुकानदारों ने भी भगवान शिव के पोस्टर की पोशाकों से दुकानों को सजा रखा है। नैथला हसनपुर निवासी पंडित अरविंद कुमार शास्त्री ने बताया कि इस बार पहला सोमवार को दुर्लभ संयोग बन रहा है। 59 साल बाद पहला सोमवार श्रावणी नक्षत्र में लग रहा है और मरुस्थलीय नागपंचमी भी 155 साल बाद पड़ रही है। बताया कि जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष या काल सर्प योग है। उन्हें इस पूजन से शांति मिलेगी।
सावन के अन्य सोमवार को भी बन रहे कई शुभ योग
सावन में सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना करने पर कई गुणा लाभ मिलता है और भक्त को कष्टों से छुटकारा मिलता है। इस वर्ष सावन में हिंदू मान्यताओं के अनुसार कई शुभ संयोग बन रहे हैं। सावन का प्रथम सोमवार (22 जुलाई) को कृष्ण पंचमी है। वहीं, द्वितीय सोमवार (29 जुलाई) को त्रयोदशी प्रदोष के कारण अमृत सिद्ध योग भी है। तृतीय सोमवार (05 अगस्त) को नागपंचमी का भी योग बन रहा है। वहीं, अंतिम सोमवार 12 अगस्त को है।