दवा खरीद घोटाले की जांच कर रही विजिलेंस अपना दायरा बढ़ा सकती है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा खरीदी गई दवाओं के बिलों और दवा सप्लायरों को जारी इंडेंट की भी जांच की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों द्वारा वर्ष 1999 में दवा खरीद में अनियमितता बरती गई थी। अफसरों द्वारा बिना किसी दर अनुबंध के दवाएं खरीदी गई थीं। वर्ष 2010 में विजिलेंस जांच बैठी।
पांच साल चली जांच में मामला सही पाया गया। विजिलेंस ने पांच स्वास्थ्य अफसरों और दवा कंपनी प्रबंधक के खिलाफ नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी।
विजिलेंस दवा खरीद घोटाले में जांच का दायरा बढ़ा सकती है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्ष 1999 से वर्ष 2005 के बीच खरीदी गई दवाओं के बिलों को विजिलेंस टीम खंगाल सकती है।
इसके अलावा दवा सप्लायरों को जारी इंडेंट की भी जांच की जाएगी। विजिलेंस द्वारा जांच का दायरा बढ़ाए जाने से कई अन्य स्वास्थ्य अफसरों की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
एक विजिलेंस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मुजफ्फरनगर में एफआईआर दर्ज कराने के बाद विजिलेंस बुलंदशहर में दवा खरीद से जुड़े दस्तावेजों को खंगाल सकती है।
पूरा मामला मेरे कार्यकाल से पहले का है। विजिलेंस द्वारा की जा रही जांच के बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। यदि विजिलेंस जांच से संबंधित कुछ रिकॉर्ड देखना चाहेगी तो जांच में सहयोग किया जाएगा।
- डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ