क्षेत्र के मांचड और छपना गांव में आग लगने से किसानों की दो सौ बीघा गेहूं की फसल जल गई। सूचना पर पहुंची फायर बिग्रेड ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। घटना से किसानों को लाखों रुपये की क्षति हुई है। ग्रामीणों ने आग लगने का कारण खेतों से ऊपर जा रहे तारों में चिंगारी निकलना बताया है।
क्षेत्र के मांचड़ और छपना गांव में बृहस्पतिवार श्ााम करीब छह बजे को गेहूं की फसलों से आग की लपटें उठती देख ग्रामीणों में अफरातफरी मच गई। भारी संख्या में ग्रामीण आग बुझाने के लिए मौके पर दौड़ पड़े। आग इतनी तेज थी कि उसकी लपटें फैलती जा रही थीं। देखते ही देखते आग ने करीब दो सौ बीघा खेतों में खड़ी गेहूं की फसलों को अपनी चपेट में ले लिया।
फायर ब्रिगेड ने दो घंटे की कड़ी मश्ाक्कत के बाद आग पर काबू पाया। वरना और भी कई खेत आग की चपेट में आ सकते थे। आगजनी में किसान दीना की 15 बीघा, राजेंद्र की आठ बीघा, मनोहर और शीशपाल की 12 बीघा, बलवीर तथा सुभाष की 7 बीघा, बहादुर की 40 बीघा, रविंद्र की 15 बीघा, अशोक की 16 बीघा, जुगलकिशोर की 9 बीघा, दिलीप की 25 बीघा, जितेंद्र तथा बनी सिंह की पांच बीघा समेत किसानों की करीब 200 बीघा फसल जल गई। इससे उनका लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
वहीं, बीबीनगर में आग लगने से बहांपुर निवासी नरेंद्र सिंह की पांच तथा ललित कुमार की तीन बीघे गन्ने की फसल जल कर राख हो गई। जबकि सरनवीर सिंह की पांच, दिनेश की चार तथा यादराम की दो बीघे गेहूं की फसल भी आग की भेंट चढ़ गई। वहीं, बैनीपुर निवासी सुभाष चंद की सात बीघा गेंहू की फसल विद्युत तार टूटने से जल कर राख हो गई। ग्रामीणों ने तहरीर दी है।