बुलंदशहर। अदालत ने करीब 26 साल पुराने चोरी के मामले में फैसला सुनाया है। कोतवाली देहात क्षेत्र में वर्ष 1999 में एक ट्यूबवेल से मोटर चोरी करने की कोशिश करने वाले आरोपी को न्यायालय ने दोषी करार देते हुए जेल में बिताई गई अवधि की सजा सुनाई है। साथ ही, दोषी पर 500 रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव कौंदू निवासी कुंवरपाल सिंह की ट्यूबवैल पर चोरी की नीयत से धावा बोला गया था। गांव रसूलपुर निवासी अभियुक्त देवराज ने ट्यूबवेल का मोटर खोलने का प्रयास किया। आरोपी को पकड़ लिया गया। इस घटना के संबंध में 11 अक्तूबर 1999 को थाना कोतवाली देहात में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसी महीने की 31 तारीख को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। बुधवार को न्यायाधीश अर्जुन सिंह डबास एसीजे एसडी-02 ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर देवराज को दोषी पाया। न्यायालय ने अभियुक्त को उसके द्वारा पूर्व में जेल में काटी गई अवधि की सजा और 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
चोरी का आरोपी 15 वर्ष बाद दोषी करार
बुलंदशहर। न्यायालय ने चोरी के 15 साल पुराने मामले में एक अभियुक्त को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने दोषी को उसके द्वारा जेल में बिताई गई अवधि की सजा सुनाई। दोषी पर एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। हापुड़ क्षेत्र स्थित मोहल्ला पीर बाबूजी निवासी वसीम ने बुलंदशहर के कोतवाली नगर क्षेत्र में चोरी की एक वारदात को अंजाम दिया था। अभियुक्त ने वादी के घर सहित मोहल्ले के कई अन्य घरों में भी हाथ साफ किया।
इस संबंध में 5 अगस्त 2010 को थाना कोतवाली नगर में केस दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले की त्वरित जांच करते हुए 28 सितंबर 2010 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। हालांकि, न्यायिक प्रक्रिया के चलते मामला लंबे समय से लंबित था। एसीजेएम-02 अविरल सिंह की अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर वसीम को दोषी पाया। अदालत ने दोषी को न्यायालय उठने तक की सजा और जेल में पूर्व में बिताई गई अवधि को सजा के रूप में मान्य करते हुए 1,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।