सिकंदराबाद कोतवाली क्षेत्र में हुए जानलेवा हमले के एक आरोपी को जमानत दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेज बनवा लिए गए। एक अधिवक्ता ने उन फर्जी दस्तावेजों का सत्यापन कर दिया। जांच में पता चला कि दोनों जमानती गांव में हैं ही नहीं। आरोपियों ने थाने की फर्जी मोहर, दरोगा के फर्जी हस्ताक्षर लगाकर कोर्ट में पेश कर दिए।
एसपी सिटी ने जांच कराकर एक दरोगा की तहरीर पर अधिवक्ता के खिलाफ नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है। एसपी सिटी मान सिंह चौहान ने बताया कि 2015 में सिकंदराबाद कोतवाली में आईपीसी की धारा 379/411/147/148/149/307 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में एक आरोपी फुरकान पुत्र लियाकत निवासी तिलबेगमपुर जेल में बंद था।
26 अक्तूबर 2016 को एडीजे-8 के कोर्ट में फुरकान की जमानत संबंधी दस्तावेज पेश किए गए। पता चला कि लियाकत को जमानत मानकचंद पुत्र लायकराम व भोलाचंद पुत्र सुम्मेरा निवासी गांव उटरावली थाना कोतवाली देहात ने दी है। जमानत के दस्तावेजों में जमानतियों की तस्दीक का प्रमाणपत्र भी था जिसे अधिवक्ता संजीव शर्मा ने सत्यापित किया था।
न्यायालय ने उन दस्तावेजों पर लियाकत को जमानत भी दे दी, लेकिन लियाकत जेल से नहीं छूट पाया और फर्जी दस्तावेजों की पोल खुल गई। मामला संज्ञान में आने पर एसपी सिटी ने जांच बैठाई। जांच में पता चला कि मानकचंद और भोलाचंद गांव उटरावली में हैं ही नहीं। साथ ही पता चला कि कोतवाली देहात में यशपाल सिंह नाम का कोई दरोगा तैनात ही नहीं है।
जमानतियों को तस्दीक करने की कोई कार्रवाई कोतवाली देहात के दस्तावेजों में दर्ज नहीं है। इससे पता चला कि अधिवक्ता संजीव शर्मा ने थाने की फर्जी मोहर बनवाकर फर्जी तरीके से जमानतियों के तस्कीद संबंधी पत्र बनाया और न्यायालय में पेश किया। नगर कोतवाल ने बताया कि अधिवक्ता संजीव शर्मा के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कर ली है।