सिकंदराबाद। कचरे में मिले लावारिस स्मार्ट कार्डों को कब्जे में लेकर ईएसआई की टीम ने शुक्रवार को कार्डों को डिस्पैच करना शुरू कर दिया है। मामले में जांच ईएसआई, नोएडा ब्रांच को सौंपी गई है। ऐसे में कार्रवाई प्रारंभ होने से स्थानीय अफसरों में हड़कंप मच गया है। गौरतलब है कि बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने कचरे में मिले सैकड़ों स्मार्ट कार्डों को संजीदगी से लिया था और ‘कचरे में स्मार्ट कार्ड’ शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
बृहस्पतिवार को अग्रसेन इंटर कॉलेज के सामने समाज सेवी हेमंत शर्मा को सैकड़ों स्मार्ट लावारिस अवस्था में पड़े मिले थे। कार्ड श्रम मंत्रालय ने राज्य कर्मचारी बीमा निगम के माध्यम से प्राइवेट-लिमिटेड कंपनी और कल-कारखानों में काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों को जारी किए गए थे। सरकारी सिस्टम की उदासीनता के चलते मजदूर और कर्मचारियों के हाथ में पहुंचने के बजाय कार्डों को कचरे में फेंक दिया गया। सरकारी अफसरों के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार की सिकंदराबाद के लोगों ने पुलिस और प्रशासन से शिकायत की। अब जब की मामला सार्वजनिक हो चुका है संबंधित विभाग ने मामले में जांच बैठा दी है।
ईएसआई के डिप्टी डायरेक्टर राकेश शर्मा का कहना है कि मामले की पड़ताल की जा रही है। जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई की जाएगी। उधर, स्मार्ट कार्डों को कब्जे में लेकर सिकंदराबाद ब्रांच ने डिस्पैच करने शुरू करवा दिए हैं। बता दें कि स्मार्ट कार्ड की मदद से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कार्यरत मजदूर और कर्मचारी ईएसआई के हॉस्पिटलों में नि:शुल्क उपचार करा सकते हैं।