कृषि विभाग की टीम ने गेहूं की फसल की क्षति का आकलन कर लिया है। आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से जनपद में 30 हजार हेक्टयेर गेहूं की फसल बर्बाद हुई है। फसल बर्बादी की रिपोर्ट कृषि विभाग ने तैयार कर ली है। इसी रिपोर्ट के आधार पर किसानों को आर्थिक लाभ मिलना है।
जनपद में दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल खड़ी है। गेहूं की फसल दुग्धावस्था में है, मतलब गेहूं की बालियों में दूध पड़ने लगा है। मिल्किंग स्टेज में गेहूं की फसल ढहने से दाना पतला होे जाएगा। दाने की गुणवत्ता दोयम दर्जे की होगी। इसका सीधा असर गेहूं उत्पादन पर पड़ेगा।
गिरी हुई फसल में चूहों का खतरा बढ़ जाएगा। इन सभी बिंदुओं को दृष्टिगत रखते हुए कृषि विभाग ने क्षति का आकलन किया है। ब्लॉक सिकंदराबाद, अरनिया, पहासू, स्याना, बीबीनगर, ऊंचागांव, अगौता, लखावटी, अनूपशहर, शिकारपुर, डिबाई और बुलंदशहर में गेहूं की फसल को अधिक क्षति पहुंची है।
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9123 हेक्टेयर फसल का है बीमा
कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा सीजन में 6339 किसानों ने 9123 हेक्टेयर गेहूं की फसल का बीमा करवाया था। 6339 किसानों ने 60 लाख रुपये प्रीमियम भी जमा किया है। इससे साफ है कि बीमा कंपनी मात्र 9123 हेक्टेयर गेहूं की फसल का मुआवजा 6339 किसानों को देगी।
वहीं, आलू की फसल का बीमा 295 किसानों ने कराया था। बीमित आलू की फसल का क्षेत्रफल 234 हेक्टेयर है। शतप्रतिशत क्षति होने पर आलू उत्पादन करने वाले किसानों को बीमा का लाभ मिलेगा। आलू किसानों ने 6.71 लाख रुपये प्रीमियम भी जमा करवा दिया है।
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जनपद में गेहूं की 30 हजार हेक्टेयर फसल क्षति की जद में है। 30 हजार हेक्टेयर में 50 फीसदी या इससे अधिक नुकसान हुआ है। क्षति की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। जल्द ही सर्वे रिपोर्ट प्रशासन को भेजी जाएगी।