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टिकटों की दौड़ में 3 जिलाध्यक्ष, भाजपा लगा सकती है दांव

Mon, 26 Dec 2016 11:29 PM IST
अमर उजाला/बुलंदशहर
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सुभाष गांधी। - फोटो : ब्यूरो
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विधानसभा चुनाव-2017 में जिले में तीन प्रमुख राजनीतिक पार्टियाें सपा, कांग्रेस और रालोद के जिलाध्यक्ष ताल ठोकने को तैयार हैं। तीनों जिलाध्यक्ष अपने पार्टी हाईकमान को टिकट के लिए आवेदन भेज चुके हैं। जबकि भाजपा भी अपने जिलाध्यक्ष पर दांव खेल सकती है, लेकिन इसमें वेस्ट यूपी के जातीय समीकरण को ध्यान में रखा जाएगा।
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विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक पार्टियोंकी गतिविधियां तेज हो गई हैं। जिले की सभी सातों सीटों पर अपने पत्ते (टिकट) खोल चुकी बसपा प्रत्याशियों की घोषणा करने में सबसे आगे है। जबकि सपा स्याना सीट को छोड़कर अन्य छह सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार चुकी है।

खास बात यह है कि सपा के जिलाध्यक्ष दिनेश गुर्जर, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुभाष गांधी और रालोद के जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी ने भी चुनाव मैदान में उतरने के लिए दावेदारी ठोकी है। तीनों जिलाध्यक्ष अपने पार्टी हाईकमान को काफी समय पहले टिकट के लिए बायोडाटा भेज चुके हैं।
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अनूपशहर से सपा जिलाध्यक्ष दिनेश गुर्जर और रालोद जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी, जबकि कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुभाष गांधी शिकारपुर से टिकट मांग रहे हैं। अगर पार्टियां हां कहती हैं तो अनूपशहर से दो जिलाध्यक्ष आमने-सामने ताल ठोकेंगे। हालांकि सपा अनूपशहर से अपने पूर्व जिलाध्यक्ष हिमायत अली को प्रत्याशी घोषित कर चुकी है।

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भाजपा भी हिमांशु मित्तल को चुनाव मैदान में उतार सकती है। हालांकि हिमांशु मित्तल ने पार्टी में टिकट के लिए दावेदारी नहीं की है, लेकिन राजनीतिक पंडितों का दावा है कि अगर गौतमबु्द्धनगर की नोएडा सीट से विमला बाथम का टिकट कटता है और वहां केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह प्रत्याशी घोषित हुए तो हिमाशु मित्तल को बुलंदशहर से चुनाव लड़ाया जा सकता है, क्योंकि पार्टी वेस्ट यूपी में एक सीट वैश्य कंडीडेट को देना चाहती है।

जिलाध्यक्ष पद के साथ लड़ेंगे चुनाव
अगर जिलाध्यक्षोें का टिकट पार्टियां फाइनल करती हैं तो या वह पद छोड़ेंगे या फिर जिलाध्यक्ष रहकर ही चुनाव लड़ सकते हैं। यह सब पार्टी हाईकमान पर निर्भर करेगा। रालोद जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी का कहना है कि वह पिछला चुनाव भी जिलाध्यक्ष पद पर रहते हुए लड़े थे।

वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुभाष गांधी का कहना है कि यह पार्टी हाईकमान के निर्णय पर निर्भर करेगा कि वह पद पर रहते चुनाव मैदान में उतरेंगे। या किसी अन्य को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
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