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जिले में फिर से दिखने लगा धुंध का असर

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प्रदूषण युक्त धुंध से फूलने लगा लोगों का दम
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बुलंदशहर। जिलेभर में मंगलवार को प्रदूषण युक्त धुंध छाए रहने से लोगों का दम फूलने लगा है। स्मॉग से लोगों की आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी हो रही है।
जिले भर में मंगलवार को आसमान में प्रदूषण युक्त धुंध छाई रही। इस दौरान पीएम 2.5 में सोमवार से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। विशेषज्ञों के अनुसार अभी धुंध का असर कम है। इसका असर बढ़ने पर खासकर बुजुर्गों, दमे के मरीजों, बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही लोगों को सांस लेने में परेशानी के साथ आंखों में भी जलन महसूस होगी। उन्होंने लोगों से एहतियात बरतने के साथ इससे बचने के लिए आंखों पर चश्मा और मुंह पर कपड़ा बांधकर घर से निकलने को कहा है।
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कृषि अधिकारियों के अनुसार जल्द ही बारिश हो जाए तो यह धुंध पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। इसके लिए बारिश होना सबसे सरल व उत्तम उपाय है।

धान की पुआल को न जलाएं किसान
विशेषज्ञों के अनुसार इस समय धान की पुआल का धुआं काफी नुकसानदायक होता है। यह धुआं स्मॉग के साथ मिलकर इसको इस कदर जहरीला बना देता है कि यदि दस मिनट कोई भी व्यक्ति इस धुएं के संपर्क में रहे तो उसकी जान भी जा सकती है।

खेतों में जलाया पुआल तो होगी कार्रवाई
बढ़ते वायु प्रदूषण और धुंध के दुष्परिणामों को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी भी सख्त हो गए हैं। जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने मंगलवार को आला अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने बताया कि जल्द ही बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए कोई उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में स्थिति गंभीर रूप धारण कर सकती है। साथ ही कृषि अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले में धान की फसल की कटाई का काम चल रहा है। किसान गेहूं की फसल को जल्द बोने के प्रयास में पराली जलाने का प्रयास करेंगे। पराली जलाने से रोकने के लिए ग्रामवार टीम बनाकर किसानों को जागरुक किया जाए और पराली जलाने वाले किसानों के विरुद्ध 2500 रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक का जुर्माना वसूला जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी गांव में पराली जलाने की शिकायत मिली तो लापरवाह अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

क्या करें क्या न करें
- बच्चे, शिशु, गर्भवती महिलाएं व किसी भी बीमारी से पीड़ित लोग जितना अधिक हो सके घरों में ही रहें।
- स्मॉग के दौरान अधिक आवश्यकता पर ही घर से बाहर निकलें।
- सूर्य निकलने के बाद ही अधिक से अधिक काम निपटाएं।
- संभव हो तो बच्चों को धूप निकलने के बाद ही घर से बाहर निकालें।
- सूर्य निकलने के बाद घर के दरवाजे व खिड़की खोल दें।
- घर से बाहर निकलते समय चेहरे पर मॉस्क का प्रयोग करें।
- सुबह व शाम के समय टहलने से बचें।
- केमिकल युक्त रूम फ्रेशनर का प्रयोग न करें।
- अचानक सांस लेने में परेशानी होने पर चाय की पत्ती उबालकर भाप लें और चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।
- केमिकल युक्त पेय पदार्थों के प्रयोग से बचें।

कोट
वायु प्रदूषण को रोकने के लिए ईंट भट्टों का संचालन नही किया जाएगा। होटल एवं ढाबों पर कोयला एवं लकड़ी जलाने पर और एनजीटी के नियम विरूद्व निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। उन्होंने जिलेवासियों से प्रदूषण रोकने में सहयोग करने की बात कही। - अनुज कुमार झा, जिलाधिकारी

जिले में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए उपाय किए जा रहे है। जनता को भी बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए जागरुक होना पड़ेगा और खेतों में किसान धान की पुआल को न जलाएं। - इं. जीएस श्रीवास्तव, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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स्मॉग के कारण मरीजों के साथ स्वस्थ लोगों को भी काफी परेशानी होती है। इससे बचने के लिए सुबह व शाम के समय टहलने या खुले स्थान में जाने से बचें। साथ ही केमिकल युक्त पदार्थों के प्रयोग से भी बचें। सांस के मरीजों के लिए मुख्य रूप से बचाव की आवश्यकता है। - डॉ. सुष्पेंद्र कुमार, प्रभारी सीएमओ
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