बिना पंजीकरण के चल रहे कोचिंग सेंटर
बुलंदशहर। जिलेभर में बिना पंजीकरण के सैकड़ों कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे है। कोचिंग सेंटरों पर विभागीय अफसरों द्वारा कार्रवाई न करने से छात्र-छात्राओं और अभिभावकों का जमकर शोषण किया जा रहा है। इससे विभाग को जहां लाखों रुपये के राजस्व को चूना लग रहा है। वहीं, शिक्षक भी विद्यालय की कक्षाओं को छोड़कर घरों में कोचिंग कक्षाएं संचालित कर रहे हैं।
विगत 15 वर्ष पूर्व प्रदेश सरकार ने कोचिंग सेंटर चलाने के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया था। इसके लिए शासन से छात्र संख्या के आधार पर पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया था। शासनादेश के लागू होने के बाद जिले में एक साथ दो सौ के करीब कोचिंग संस्थाओं का पंजीकरण हुआ। जानकारी के अनुसार कोचिंग के लिए अधिक धनराशि न देनी पड़े इसके लिए छात्र संख्या कम दर्शा कर पंजीकरण ले लिया गया। इसके बाद पंजीकरण कम होते चले गए। नगर, खुर्जा, सिकंदराबाद, औरंगाबाद, जहांगीराबाद समेत जिलेभर में बिना पंजीकरण के कोचिंग सेंटर संचालित किए जा रहे है। कोचिंग सेंटरों पर एक विषय का चार सौ से आठ सौ रुपये लिए जाते है। एक से अधिक विषय की कोचिंग करने पर बच्चों को फीस में कुछ छूट मिल जाती है। जबकि इनके पास योग्य शिक्षक तक नहीं है। विभाग यह जांचने की जरूरत नहीं समझता कि किस योग्यता के लोग कोचिंग सेंटरों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। डीआईओएस आरके तिवारी ने बताया कि समय-समय पर अभियान चलाकर या शिकायत मिलने पर कोचिंग सेंटरों पर कार्रवाई की जा रहीं है। बिना पंजीकरण कोचिंग सेंटरों का संचालन नहीं होने दिया जाएगा।