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उपचार में लापरवाही से महिला की हालत बिगड़ी

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उपचार में लापरवाही से
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महिला की हालत गंभीर
गुलावठी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती थी महिला
- नसबंदी के लिए महिला की बाजू में लगाया गया था इंजेक्शन
अमर उजाला ब्यूरो
गुलावठी।
यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के दौरान लापरवाही से इंजेक्शन लगाने के चलते एक महिला को हाथ कटवाने की नौबत आ गई है। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बृहस्पतिवार को जमकर हंगामा किया। इस मामले में परिजनों ने स्वास्थ्य केंद्र के एक चिकित्सक के खिलाफ थाने में तहरीर दी है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक मामले में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी है।
जानकारी के अनुसार ग्राम भटौना निवासी किरनपाल प्रजापति की पत्नी कुसुम को नसबंदी ऑपरेशन के लिए आठ मई को सामुदायिक स्वास्थ्य में भर्ती किया गया था। आठ मई को ऑपरेशन से पूर्व कुसुम की बाजू में एक इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद से कुसुम की हालत बिगड़ गई। परिजनों ने इस संबंध में चिकित्सकों को बताया तो उन्होंने कुसुम को दर्द निवारक क्रीम दे दी। बताया जा रहा है कि क्रीम लगाने के बाद भी महिला का हाथ नीला पड़ना शुरू हो गया इस पर परिजन उसे लेकर चिकित्सक के पास पहुंचे। आरोप है कि चिकित्सकों ने इस दौरान कुसुम और उसके परिजनों के साथ अभद्रता शुरू कर दी। इससे नाराज परिजनों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। काफी देर चले हंगामे के बाद चिकित्सकों ने कुसुम को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। कुसुम के पति किरनपाल सिंह का आरोप है कि बुलंदशहर जिला अस्पताल में चिकित्सकों का व्यवहार संवेदनशील नहीं रहा। वहां उसे यह कहकर भगा दिया गया कि तुम्हारा हाथ कटने से ही ठीक होगा। ग्रामीणों ने चिकित्सक पर गलत तरीके से इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाते हुए कुसुम की परेशानी के लिए चिकित्सक को जिम्मेदार बताकर थाने में तहरीर दी। महिला के परिजनों को समझाते हुए जिला अस्पताल में मौजूद चिकित्सक ने कुसुम को मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। अस्पताल में मौजूद चिकित्सक अमित कुमार ने बताया कि केंद्र अधीक्षक छुट्टी पर हैं। डॉ. अमित कुमार के अनुसार जिस दिन कुसुम की नसबंदी हुई थी। उसी दिन कुल 14 महिलाओं को वहीं इंजेक्शन लगाए गए थे। केवल कुसुम के मामले में ही परेशानी की बात सामने आई है। उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया है।
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इंजेक्शन लगने से एक सिपाही की भी हो चुकी है मौत
- 11 अक्तूबर को बुखार के इलाज के लिए लगाया गया था इंजेक्शन
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। सरकारी अस्पतालों में मरीजों के साथ अभद्रता व इलाज में लापरवाही का आरोप नया नहीं है। इससे पूर्व भी अक्तूबर 2015 में बुखार के इलाज के लिए पहुंचे एक सिपाही की हालत इंजेक्शन लगाने के बाद खराब हो गई थी। सिपाही की दिल्ली के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्थाओं, लापरवाही से उपचार के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। बृहस्पतिवार को गुलावठी सीएचसी में महिला की बाजू में इंजेक्शन लगाने के बाद हाथ के नीले पड़ने और चिकित्सकों द्वारा हाथ काटने की सलाह देने से करीब ढाई वर्ष पूर्व हुई घटना एक बार फिर ताजा हो गई। ढाई वर्ष पूर्व 11 अक्तूबर को पुलिस लाइन में तैनात सिपाही अजमत खान को भी बुखार के इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां चिकित्सक ने सिपाही को इंजेक्शन लगा दिया था, जिसके बाद सिपाही की हालत गंभीर हो गई थी। अगले दिन जब सिपाही को दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया तो चिकित्सकों ने उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। बताया जा रहा है कि गलत इंजेक्शन लगने के कारण सिपाही अजमत का शरीर फटना शुरू हो गया। करीब डेढ़ सप्ताह तक इलाज की कोशिश करने के बाद भी अजमत ने दिल्ली के अस्पताल में दम तोड़ दिया था। मामले में आरोपी चिकित्सक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। चिकित्सक पर रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद चिकित्सक संघ ने हड़ताल की घोषणा कर दी थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच समझौते से मामले का निपटारा हो गया था।
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