70 हजार हेक्टेअर भूमि में खड़ा गन्ना, पर्ची के लिए भटक रहे किसान
- किसान अब पशोपेश में गन्ना काटें या फिर गेहूं की फसल उठाएं
- सहकारी गन्ना समिति में कई कर्मियों पर कार्रवाई के बाद भी नहीं सुधर रहे हालात
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
शासन की चीनी मिलों पर सख्ती और सहकारी गन्ना समिति में कई कर्मियों पर कार्रवाई के बाद भी हालात जस के तस हैं। किसान अब पशोपेश में हैं कि गन्ना कटाई करें या फिर गेहूं की फसल उठाएं। स्थिति यह है कि अब भी 70 हजार हेक्टेयर भूमि में गन्ना खड़ा है और किसान पर्ची के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं।
जब से चीनी मिलें चली हैं, तब से लेकर अब तक शासन से लगातार आदेश प्राप्त हो रहे हैं कि गन्ना किसानों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी। मगर, इन आदेशों का धरातल पर पालन नहीं हो रहा है। किसानों का कहना है कि यदि उन्हें पर्ची समय पर मिलती तो अब तक उनका गन्ना खेत में खड़ा नहीं रहता। विगत वर्ष इस समय तक वह अपना गन्ना मिल तक पहुंचा चुके थे, लेकिन इस बार सिर्फ परेशानी के सिवा कुछ नहीं मिल रहा। सहकारी गन्ना समिति और मिल के अफसर उन्हें कोई रास्ता नहीं दिखा पा रहे और अब तक न ही शासन के उस आदेश का पालन किया है, जिसमें कहा गया था कि जिन किसानों का खेत में गन्ना खड़ा है, उनका री-कैलेंडर जारी कर पर्ची जारी की जाएं। वहीं, सलेमपुर गांव निवासी किसान सुधीर, भैंसरोली निवासी योगेंद्र, सतपाल समेत कई किसानों ने बताया कि यदि हालात नहीं सुधरे तो गेहूं कटाई के समय उन्हें गन्ना काटने के लिए मजदूर नहीं मिलेंगे और परेशानी का सामना करना पड़ेगा। यह स्थिति तब है जबकि गन्ना समिति के दो सचिव और दो कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। उधर, जिला गन्ना अधिकारी एपी सिंह का कहना है कि किसानों की समस्या को दूर करवाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों का गन्ना खरीदने के बाद ही मिल बंद होंगी। शासन के आदेशों का पालन करने और करवाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
चीनी मिल से किसानों को नहीं मिल रही है पर्ची
अनूपशहर। भारतीय किसान यूनियन भानुगुट के उपाध्यक्ष संतोष मोहन शर्मा ने अनूपशहर चीनी मिल प्रबंधन पर निजी हित में कार्य करने और कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए रोष जताया है। मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में उन्होंने नाराजगी जताई। कहा कि किसानों को नियमानुसार पर्ची नहीं दी जा रही है। इससे किसानों का गन्ना खेतों में खड़ा रहने की आशंका है। किसानों को गत वर्ष ली गई दवा पर अनुदान के पैसे नहीं मिले हैं। चीनी मिल के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की करोड़ों रुपये बकाया ग्रेच्युटी नहीं दी गई है। संतोष मोहन शर्मा ने चीनी मिल गेट व गन्ना क्रय केंद्रों पर घटतौली किए जाने की भी शिकायत की है। ब्यूरो