इब्राहिमपुर जुनेदपुर उर्फ मौजपुर का ग्राम प्रधान निलंबित
- ग्राम समाज की भूमि सगे संबंधियों को आवंटित करने का आरोप
- जांच में दोषी पाए जाने पर डीएम के आदेश की कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
ग्राम समाज की भूमि को सगे संबंधियों और रिश्तेदारों को अवैध तरीके से आवंटित करने के आरोप में गांव इब्राहिमपुर जुनेदपुर उर्फ मौजपुर की ग्राम प्रधान बबीता को निलंबित कर दिया गया है। डीपीआरओ ने डीएम के आदेश पर प्रधान को निलंबन संबंधी आदेश की कॉपी भेजकर सभी अधिकार वापस ले लिए हैं।
पिछले दिनों प्रधान की जिला प्रशासन को शिकायत मिली थी कि उसने ग्राम सभा की भूमि को सगे संबंधियों और रिश्तेदारों को अवैध तरीके से आवंटित कर दिया है। इसकी जांच करवाई गई तो शिकायत सही मिली। पूरा मामला न्यायालय कलक्ट्रेट में पहुंचा और प्रधान से लगाए गए आरोप के संबंध में स्पष्टीकरण भी मांगा गया। प्रधान ने इसका जवाब भी दिया। जांच में खुलासा हुआ कि जिन लोगों को भूमि का आवंटन किया गया, उनमें से एक व्यक्ति पिछले 20 वर्ष से मुंबई में रहता है। इसी तरह कई और अन्य लोग भी गांव में नहीं रहते। जांच पूरी होने पर प्रधान को दोषी पाया गया। इस पर डीएम डॉ. रोशन जैकब ने प्रधान बबीता को निलंबित कर दिया। पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। सीडीओ जसजीत कौर डीपीआरओ अमरजीत सिंह ने बताया कि गांव इब्राहिमपुर जुनेदपुर उर्फ मौजपुर की प्रधान बबीता को डीएम के आदेश पर निलंबित कर दिया गया है।
सरकारी धन के गबन में ग्राम पंचायत अधिकारी निलंबित
- खुर्जा की ग्राम पंचायत चिगरावली में बन रहे शौचालयों की राशि में की हेराफेरी
- सीडीओ ने मामले की जांच तीन अफसरों को सौंपी
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
शौचालयों की राशि में सरकारी धन का गबन और दुरुपयोग करने के आरोप में खुर्जा क्षेत्र की ग्राम पंचायत चिंगरावली के ग्राम पंचायत अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। सीडीओ ने निलंबित ग्राम पंचायत अधिकारी की जांच के लिए तीन अफसरों की टीम बनाकर आदेश भी जारी कर दिए हैं। इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप है।
प्रशासन को कुछ दिन पहले ग्राम पंचायत चिंगरावली के ग्राम पंचायत अधिकारी शेरपाल सिंह की शिकायत मिली थी। आरोप लगाया था कि उसने शौचालय निर्माण में हेराफेरी की है। इसकी जांच के लिए जिला मत्स्य अधिकारी और सहायक अभियंता ग्रामीण अभियंत्र विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई। जांच में खुलासा हुआ कि गांव में 209 शौचालयों का निर्माण हुआ। इनमें एक शौचालय अपात्र का बनाया गया। अधिकतर शौचालयों का निर्माण नियम के विरुद्ध पाया गया। इतना ही नहीं शौचालय के पात्रों को निर्धारित 12 हजार के सापेक्ष मात्र छह हजार और 10 हजार रुपये ही दिए गए। एक पात्र को दो बार राशि आवंटित करने और एक मृतक को शौचालय दिए जाने सहित कई आरोप साबित हुए। जांच में खुलासा हुआ कि ग्राम पंचायत अधिकारी ने सरकारी धन का गबन और दुरुपयोग किया है। इस पर डीएम के आदेश पर सीडीओ ने ग्राम पंचायत अधिकारी शेरपाल सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। डीपीआरओ अमरजीत सिंह ने बताया कि निलंबित किए गए ग्राम पंचायत अधिकारी की जांच के लिए तीन प्रशासनिक अफसरों को नियुक्त कर जल्द जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है।