जीएसटी पड़ रही भारी, दिवाली में मंदी हुई खरीदारी
- बाजार बेजार
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- त्योहारों के बाद भी बाजार में नहीं दिख रही चहल-पहल
- इलेक्ट्रानिक सामान पर है 28 तो बर्तन पर 12 से 18 फीसदी जीएसटी
- कपड़ों पर सात और ज्वेलरी पर तीन फीसदी जीएसटी
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। दिवाली नजदीक है और बाजार भी सज चुके हैं। बाजार में जरूरत का हर सामान उपलब्ध करवाने को दुकानदार और व्यापारियों ने तैयारी पूरी कर ली है, लेकिन भारी-भरकम जीएसटी लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। इससे अब तक पिछले वर्ष से कम खरीदारी हुई है।
दिवाली नजदीक आते ही हर कोई इलेक्ट्रॉनिक सामान हो या फिर बर्तन, वस्त्र और ज्वैलरी खरीदने की आस रखता है। इसके लिए वह पहले से रुपये जोड़ना भी शुरू कर देता है। खासकर धनतेरस पर तो लोग अपनी जरूरत और मनपसंद का सामन खरीदते हैं, लेकिन इस बार इलेक्ट्रॉनिक सामान पर 28 फीसदी जीएसटी है। जबकि बर्तन पर 12 से 18, वस्त्रों पर सात और ज्वैलरी पर तीन फीसदी जीएसटी है। ऐसे में सामान भी महंगा पड़ रहा है तो ग्राहकों की जेब पर यह भारी हो गया है। बाजार में चर्चा है कि अमीर व आम वर्ग तो इसे झेल लेेगा, लेकिन गरीब की पहुंच से दूर है। ऐसे में दुकानदार और व्यापारियों को कारोबार कम होने की भी चिंता सताने लगी है।
चाइनीज सामान पर भी 12 फीसदी जीएसटी
बाजार में चाइनीज सामान की भी भरमार है और इस सामान पर 12 फीसदी तक जीएसटी है। इसके चलते इनकी डिमांड घट गई है। डिप्टी गंज बाजार में बिजली के सामान की दुकान चलाने वाले दुकानदार नीरज का कहना है कि चाइनीज सामान की कमी नहीं है, लेकिन जीएसटी लगने से दाम बढ़ गए हैं। इसके चलते इनकी डिमांड घट गई है। चाइनीज सामानों के खरीदार कम हो गए हैं।
कपड़ा व्यापार हो रहा प्रभावित
कपड़ा व्यापारी दुर्गेश गोयल का कहना है कि वस्त्रों पर जीएसटी सात फीसदी लगने से कारोबार पर कुछ असर पड़ा है। वहीं दूसरी ओर हरभजन सिंह और रंजीत सिंह का कहना है कि जीएसटी लगने से व्यापार प्रभावित हो रहा है। अब दिवाली नजदीक है और उन्हें ग्राहक बढ़ने की उम्मीद है।
ज्वैलरी की बिक्री पर भी असर
ज्वैलर्स राजीव कुमार का कहना है कि जीएसटी तीन फीसदी लगने से बिक्री पर असर है। अब लोग सिर्फ जरूरत के लिए ही जेवर खरीद रहे हैं। सराफ सुभाष वर्मा का कहना है कि जब से जीएसटी लगा है तो कभी-कभी पूरा दिन ग्राहक का भी इंतजार करना पड़ जाता है।
जरूरत के ही बर्तन खरीद रहे लोग
बर्तन विक्रेता संत कुमार अरोड़ा का कहना है कि जब से बर्तन पर 12 से 18 फीसदी तक जीएसटी लगी है। तब से बिक्री पर भी असर पड़ा है। ग्राहक दुकान पर पहुंचता तो है, लेकिन स्थिति यह है कि जीएसटी का नाम सुनकर वह जरूरत के बर्तन ही खरीद रहा है।
ग्राहकों में आई कमी
इलेक्ट्रानिक शोरूम संचालक हरि महेश्वरी का कहना है कि इलेक्ट्रानिक सामान पर 28 फीसदी जीएसटी लगने से ग्राहकों में कमी आई है। दिवाली के नजदीक आते ही लोग अपनी जरूरत के सामान की खरीद के लिए पहुंच जाते थे, लेकिन इस बार ग्राहक कम पहुंच रहे हैं। उम्मीद है कि धनतेरस वाले दिन ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी।
अंधेरे में मनेगी पटाखा व्यापारियों की दिवाली
बुगरासी। जीएसटी की मार झेल रहे व्यापारियों की पटाखों की बिक्री पर रोक लगने से कमर टूट गई है। लाखों रुपये की आतिशबाजी स्टॉक कर चुके व्यापारियों की दिवाली पर इस बार अंधेरा छाने के पूरे आसार हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कस्बा क्षेत्र में आतिशबाजी की बिक्री पर पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा। पटाखों की बिक्री के लिए व्यापारियों को लाइसेंस बनवाने के लिए सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उपजिलाधिकारी से क्लीन चिट मिलती है। इस बार कस्बा क्षेत्र में कोई भी लाइेंस जारी नहीं होगा। दिवाली मनाने के लिए कई व्यापारी प्रतिवर्ष पटाखों की बिक्री करते हैं। ऐसे व्यापारी पांच से 10 हजार रुपये कमाने के लिए लगभग 50 हजार से एक लाख की पटाखों की बिक्री करते हैं। पांच हजार कमाकर दिवाली मनाने वाले व्यापारियों के 50 हजार फंस गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट का आदेश छह माह पहले ही आ जाता तो व्यापारियों को यह नुकसान नहीं झेलना पड़ता।
कोट
किसी भी प्रकार के पटाखों की बिक्री के लिए कोई लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा। कुछ व्यापारियों ने लाइसेंस के लिए प्रक्रिया शुरू की है जो संबंधित थानों में प्रक्रिया में पड़े हुए हैं। वर्तमान के आदेशानुसार पटाखों की बिक्री के लिए कोई भी लाइसेंस जारी नहीं होगा।
- संजय पांडे, एसडीएम स्याना
चीनी सामान के बहिष्कार का एलान
बुगरासी। दिवाली पर इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीददारी के लिए इस बार क्षेत्र की जनता ने चीनी सामान के बहिष्कार की बात कही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि चीनी सामान के स्थान पर भारतीय सामान की खरीददारी की जाएगी।
दिवाली पर घर के गेट को सजाने के साथ विभिन्न प्रकार के इलैक्ट्रॉनिक सामान की जमकर खरीददारी की जाती है। घर के दरवाजों और ऊपर के हिस्से को सजाने के लिए चीनी झालर सबसे ज्यादा खरीदी जाती हैं। क्षेत्र की जनता इस बार चीनी सामान के बहिष्कार का मन बना चुकी है। अनिरूद्ध गोयल, हिमांशू, तुषार गर्ग आदि ने बताया कि घर के गेट को सजाने के लिए चीनी झालर के स्थान पर मिट्टी के दीपक जलाए जाएंगे। तेल के दीपक से जहां वातावरण शुद्ध होता है, वहीं चीनी उत्पाद की खरीदारी से भी मुक्ति मिलेगी। नरेश कुमार, हरवीर सिंह, अनिल कुमार, प्रदीप चौधरी, बिजेंद्र सिंह लोधी आदि क्षेत्रवासियों ने बताया कि दीपावली पर बड़ी संख्या में चीन के सामान की खरीददारी की जाती है। हमारे ही धन से फिर चीन हमें ही आंख दिखाता है। इस दिवाली पर चीन के सामान का बहिष्कार किया जाएगा। ब्यूरो