विधानसभा चुनाव-2017 में भले ही पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का काम बोल रहा है का स्लोगन हो, लेकिन अब सत्ता जाने के बाद उनका काम चिल्लाने लगा है। ताजा मामला देश के जीवित परमवीर चक्र विजेता सूबेदार योगेंद्र यादव के गांव औरंगाबाद अहीर का है।
यहां 100 बेड का अस्पताल बनना था। तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने बिना जमीन के ही अस्पताल का ऑनलाइन शिलान्यास कर दिया था। 1 अस्पताल के लिए प्रशासन अब तक जमीन मुहैया नहीं करा पाया है।
परमवीर चक्र विजेता योगेद्र यादव के गांव औरगांबाद अहीर में तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने 100 बेड का अस्पताल बनवाने की घोषणा की थी। 08 सितंबर को बाकायदा अखिलेश यादव ने अस्पताल का शिलान्यास कर दिया।
अस्पताल का निर्माण चार एकड़ भूमि पर होना था। प्रशासन ने औरंगाबाद अहीर और कोटा गांव के बार्डर पर दो हेक्टेयर भूमि तलाश करने का दावा किया था। यह जमीन प्राविधिक शिक्षा विभाग की थी, इसलिए तत्कालीन सीएमओ ने प्राविधिक शिक्षा विभाग के सचिव को अस्पताल के शिलान्यास का हवाला देते हुए दो हेक्टेयर में से 1.265 हेक्टेयर भूमि की डिमांड भेज दी, लेकिन प्राविधिक शिक्षा विभाग ने जमीन नहीं दी।
डीएम को भेजी गई रिपोर्ट में सीएमओ ने लिखा कि प्राविधिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने फोन पर जमीन देने से इंकार कर दिया है। ऐसे में परमवीर चक्र विजेता के गांव में 100 बेड के अस्पताल का निर्माण फिलहाल अटक गया है।
लखनऊ के अफसरों ने जमीन मिलने की उम्मीद में तत्कालीन सीएम से बिना जमीन के ही शिलान्यास करा दिया। परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र यादव ने अमर उजाला को बताया कि गांव में अस्पताल का निर्माण ड्रीम प्रोजेक्ट है।
प्राविधिक शिक्षा विभाग की जमीन खाली पड़ी है। इसके बावजूद अस्पताल के लिए जमीन नहीं दी जा रही है। इस प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से मिलूंगा। उन्होंने पत्र भेजकर सीएम से संज्ञान लेने की अपील की है।
औरंगाबाद अहीर में 100 बेड का अस्पताल बनने से आसपास के गांवों में रहने वाले कम से कम एक लाख लोगों को राहत मिलना तय मानी जा रही थी। सीएमओ केएन तिवारी हाल में चार्ज लेने और इस मामले की जानकारी न होने की बात कहकर अपना पीछा छुड़ा रहे हैं।