पहले डीएपी और अब प्रदेश सरकार किसानों को यूरिया भी मुहैया नहीं करा पा रही है। नतीजतन केंद्रीय उपभोक्ता भंडार पर यूरिया की खातिर एक अदद पर्ची को महिला-पुरुष किसान कई-कई घंटे लाइन में लगे रहे। नंबर न आता देख कई बार होहल्ला तक हो गया। भीड़ बढ़ती देख कर्मचारी चुपके से खिसक गए। इससे तमाम किसान बिना खाद के ही लौट गए।
किसानों के सामने यूरिया संकट बड़ी समस्या बन गया है। शहर के लावेला चौक स्थित केंद्रीय उपभोक्ता भंडार की एक दुकान पर एक ट्रक यूरिया बीते दिन मिली थी। किसानों को पता चला तो कार्यालय पर लंबी कतारें लग गईं। महीने का दूसरा शनिवार होने के बावजूद दफ्तर खुला और कुछ कर्मचारियों ने किसानों को पर्ची देकर खाद का वितरण शुरू किया। भीड़ के चलते हालात ऐसे रहे कि कई बार कतारों में लगे किसान होहल्ला करते दिखे। भंडार के कर्मियों के सामने सबसे बड़ी यह समस्या रही कि उनके पास खाद कम और किसानों की अपार भीड़। इसके अलावा दर्जनों किसान पहुंच रखने वाले भी थे।
प्रशासन के दावे भी बेकार
जिला प्रशासन किसानों को भरपूर खाद मुहैया कराने के दावे बेशक कर रहा हो, मगर जिस तरह उपभोक्ता भंडार पर लंबी कतारें लगीं उससे साफ है कि यह सह हवा हवाई ही हैं। जरूरत के हिसाब से खाद न मिल पाने से किसान सबसे ज्यादा प्रदेश सरकार को ही कोस रहा है।
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सुनिये किसानों का दर्द
बदायूं। केंद्रीय उपभोक्ता भंडार पर खाद की बोरी के लिए लाइन में लगे गुलड़िया के राजवीर के पांच बीघा गेहूं हैं। बोले, दो बोरी यूरिया चाहिए, मगर एक भी मिलना मुश्किल है। नगला शर्की के नत्थू तीन घंटे लाइन में लगे। कहा कि नंबर आ जाए, तो जानो। बोले, पहुंच रखने वाले लोग अंदर से पर्ची लेकर चले भी गए। हरवीर सिंह आमगांव से आए। बताया कि तीन दिन से आ रहे हैं, मगर कहीं भी एक अदद खाद का कट्टा तक नहीं मिल रहा।