गुरुग्राम के रॉयन इंटरनेशनल स्कूल में छात्र प्रद्युम्न ठाकुर के साथ हुई घटना से बदायूं के अभिभावकों के चेहरे पर भी चिंता नजर आने लगी है। स्कूलों के साथ अभिभावकों को भी इसके लिए अलर्ट रहने के जरूरत है। वजह साफ है कि बदायूं के स्कूली बच्चों साथ घटनाएं हुई हैं। स्कूल के जिम्मेदार कर्मचारियों का पुलिस वेरीफिकेशन ही नहीं कराते हैं। जबकि वेरीफिकेशन के साथ उनके आचरण की भी जानकारी होनी चाहिए। बच्चों के साथ घटनाएं होने के बाद भी स्कूल का प्रबंधन ही नहीं प्रशासन भी लापरवाह बना हुआ है। यह जानकर हैरत होगी कि प्रशासन की ओर से बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूल के प्रबंधन के साथ कभी कोई बैठक नहीं हुई। पिछले सालों में जो बैठकें हुई हैं वह केवल दाखिले के पचड़े सुलझाने, फीस, किताब के विवादों तक ही सिमटी रहीं। अमर उजाला की टीम ने स्कूलों का हाल जानने की कोशिश की। इस दौरान पता लगा कि बदायूं के स्कूलों का माहौल भी गुरुग्राम जैसा ही है। इसलिए आपके लाड़ले खतरे में हैं। आपको खुद ही उनका ख्याल रखना होगा।
--
सुरक्षा को लेकर नहीं होती कोई मीटिंग
स्कूलों में बच्चों के साथ अक्सर हादसे होते हैं, लेकिन न इसकी परवाह स्कूल के प्रबंधन को रहती है और प्रशासन को। स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर आज तक कोई मीटिंग प्रशासन स्तर पर नही की गई। इस साल शौक्षिक सत्र शुरू होने से पहले स्कूल प्रबंधकों की कई बैठकें आयोजित की गई, लेकिन इनमें प्रवेश को लेकर आई शिकायतों का ही निस्तारण हुआ। कुछ शिकायतें फीस, किताब, किराए को लेकर रहीं। हालांकि एक दो बैठकों में स्कूल वैन और ऑटो से होने वाले हादसों पर जरूर चर्चा हुई है। --
कर्मचारियों का पुलिस वेरीफिकेशन नहीं
स्कूलों के कार्यरत कर्मचारियों का पुलिस वेरीफिकेशन तक नही किया गया। अधिकतर स्कूलों में जो नए पुराने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं, उन्हें स्कूल ने पहचान पत्र तो जारी कर दिया, लेकिन इनके आचरण से सबंधित जानकारी इनके पास नही है।
--
बस के ड्राइवर और कंडक्टर भी बाहरी
जिन स्कूलों में खुद की बसें लगी हुई हैं। वहां उनके ड्राइवर और कंडक्टर का पहचान पत्र बनाया गया है। कुछ स्कूली बच्चों को ढोने वाले वाहनों का स्कूलों से कोई सरोकार नही है। ऐसे बालकों की जिम्मेदारी भी स्कूल नही लेते। स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि अभिभावकों को खुद इसके लिए पहल करनी चाहिए और वे अपने बच्चे किसके साथ भेज रहे हैं। इसका खास ध्यान रखें। बाहरी वाहन चालकों की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की नही है।
--
स्कूल में खुलेआम रखी रहतीं हैं, घातक चीजें
स्कूलों के प्ले ग्राउंड और बाथरूम में प्रयोग होने वाली घातक चीजें बच्चों से दूर रहनी चाहिए, लेकिन ये चीजें बच्चों के सामने ही रखी रहती हैं। घास काटने के लिए प्रयोग किए जाने वाली मशीन, खुरपी के अलावा बाथरूम साफ करने के लिए एसिड, फिनाइल भी अक्सर आस-पास ही रखे मिलते हैं।
--
अभिभावकों को नही लाड़ले का ध्यान
शहर में कई जगह जाम लगने और हाईवे से गुजरने के बाद भी अभिभावक अपने बच्चों को रिक्शे पर स्कूल भेज देते हैं। कई बार रिक्शे पलटने से हादसे हो चुके हैं। कई रिक्शाचालक शराब पीते नजर आते हैं, लेकिन अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन को इस बात का बिल्कुल ध्यान नहीं है। रिक्शे पर अधिकतर स्कूली बच्चे लटक कर जाते हैं। --
ध्यान रखे अभिभावक
-बच्चों को गुड और बैड टच के बारे में बताएं
-उनसे रोज स्कूल का रूटीन पूछें -अगर बच्चा चुप और गुमसुम दिखे तो स्कूल में संपर्क करें
-स्कूल ले जाने और छोड़ने वाले की पूरी जानकारी रखें
--
स्कूल प्रबंधन यह करे
-सभी कर्मचारियों का पुलिस वेरीफिकेशन कराएं
-उन्हें पहचान पत्र दें और ट्रेनिंग क्लास कराएं
-किसी भी कर्मचारी की शिकायत को गंभीरता से लें
-शौचालयों के आस-पास रहने वालों पर खास नजर रखें
--
बच्चों को बगैर पूूछे कहीं न जाने दें
स्कूल बस और कर्मचारी प्राइवेट एजेंसी से हायर किए गए हैं। एजेंसी ही इनका ब्यौरा रखती है। इसके बाद भी स्कूल का मैनेजमेंट इन कर्मचारियों का ध्यान रखता है। विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरें लगवाए जाने के लिए प्रक्रिया चल रही है।
-चयनिका सारस्वत, मदर एथीना स्कूल
विद्यालय के सभी कर्मचारियों का आधार कार्ड ले रखा है। प्रशासन कहेगा तो पुलिस वेरीफिकेशन करा लिया जाएगा। हालांकि कर्मचारियों की आईडी बनी हुई है।
-ज्योति मेंहदीरत्ता, प्रबंधक ब्लूमिंगडेल स्कूल
कई स्कूलों को चेक करने के बाद अपनी बच्ची अनुष्का का स्कूल में एडशिन कराया है। बच्चों कोई समस्या की बात आती है तो तुरंत स्कूल जाकर संपर्क करते हैं। -ब्रजपाल सिंह, बालाजी नगर
अपने बच्चे अभय प्रताप सिंह का सारे विद्यालय देखने के बाद पड़ोस के विद्यालय में एडमिशन कराया है, ताकि बच्चे को आने जाने में कोई कठिनाई न हो। स्कूल प्रबंधन से साफ कह रखा है कि अगर विद्यालय में दिक्कत होती हैं, तो तुरंत सूचित किया जाए।
- अमित यादव, नेकपुर