गंगा में पुल के पास बना डेथ प्वाइंट
कछला घाट पर दो महीने के दौरान जिस दिन भी हादसे हुए, उनमें अधिकतर सड़क मार्ग के पुल के पास का स्थान रहा। बताते हैं कि गंगा में पिलर के पास गहराई अधिक है। आसपास संकेतक भी नहीं लगे हैं। जबकि ज्यादातर स्नानार्थी उसी तरफ डुबकी लगाने के लिए बढ़ जाते हैं। एसडीएम सदर एसपी वर्मा ने डेढ़ महीने पहले दावा भी किया था कि गहराई वाले स्थानों पर जाल की बैरिकेडिंग करा दी जाएगी, लेकिन अमल अभी तक नहीं किया गया है।
हादसे के बाद परिजनों ने समेटा रसोई का सामान
खुशहाल सिंह की अस्थियां विसर्जन के लिए ब्रजमोहन के साथ करीब 50 लोग कछला पहुंचे थे। वह निजी वाहन में रसोई का सामान भी साथ लाए थे। ताकि अस्थि विसर्जन करने के बाद सभी लोग भोजन भी कर लें। इसके लिए उन्होंने घाट के पास ही आश्रम में अपना सिलिंडर लगाकर सब्जी बनानी शुरू कर दी थी। उन्हें जैसे ही गंगा में डूबने से सनी की मौत के बारे में पता लगा तो रिश्तेदारों ने सामान समेट लिया। किसी को भी खाना नसीब नहीं हो पाया।