बदायूं। योगी आदित्यनाथ की सरकार से लोगों ने जो उम्मीद लगा रखी थी, तीन साल पूरे होने पर उन्हें निराशा हाथ लगी। प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का संकल्प पूरा न हो पाया। अलबत्ता सड़कों की हालत और खराब हो गई। क्राइम कंट्रोल में पुलिस महकमा कुछ खास न कर पाया। महिला अपराधों में कोई कमी न आई। एंटी रोमियो स्क्वाएड यदाकदा ही नजर आया। गरीबों को लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं पर काम तो हुआ लेकिन संबंधित विभागों की कार्यशैली उनमें पलीता लगा दिया। खेती किसानी पर बातें तो बहुत हुईं, लेकिन किसानों की हालत जस की तस बनी हुई है। गनीमत रही कि बिजली व्यवस्था में सुधार दिखा। मुख्यमंत्री आवास योजना का लोगों का लाभ तो मिला लेकिन पात्रता को लेकर सवाल उठता रहा। पात्रों को अपने हक की खातिर आज भी अफसरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ऐसे मामले तहसील स्तर पर जन सुनवाई कार्यक्रमों के दौरान सुनने को मिल जाते हैं। तालाब या फिर सरकारी जमीनों पर कब्जों को लेकर अभियान भी चले लेकिन उझानी, वजीरगंज और बिसौली में कब्जों के मामलों ने अफसरों को कटघरे में खड़ा करने का काम किया है जबकि भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए योगी सरकार ने शुरू में ही अपनी मंशा उजागर कर दी थी।
शहर हो या तहसील मुख्यालय, सड़कें नहीं हो पाई गड्ढा मुक्त
शहर की सड़कों का हाल किसी से छुपा नहीं है। रोडवेज बस स्टैंड के आसपास का इलाका हो या फिर गली-मोहल्लों की सड़कें, हर जगह ही गड्ढे नजर आ जाते हैं। कुछ स्थान ऐसे भी हैं जहां गड्ढों में सड़कें नजर नहीं आतीं। तहसील मुख्यालयों में बिसौली, बिल्सी, सहसवान, दातागंज और सदर तहसील से जुड़े कस्बों में उझानी का स्टेशन रोड, कुंवरगांव, ककराला, अलापुर की स्थिति ज्यादा खराब है। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता अमर सिंह के अनुसार वित्तीय वर्ष 2019-20 में ग्रामीण क्षेत्र में सड़कों के निर्माण के लिए 33.14 लाख, हाईवे समेत शहर-कस्बों के लिए 53.01 लाख और एक दर्जन नई सड़कों के लिए 4.81 करोड रुपये स्वीकृत हुए थे। कई स्थानों पर सड़कों को गड्ढा मुक्त भी करा दिया गया। नई सड़कों को मंजूर 4.81 करोड़ रुपये में से 1.92 करोड़ रुपये अवमुक्त होने के बाद निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है। इसके विपरीत सड़कों की हकीकत ने अफसरों की पोल खोल दी है।
पुलिस ने संदिग्ध मौत बताकर कर दिए हत्या जैसे केस दफन
क्राइम कंट्रोल कैसे होता है, यह तो पुलिस के अलावा कोई और अच्छी तरह नहीं समझ सकता। इस साल चोरी की घटनाओं का ग्राफ भी तेजी से बढ़ा, बड़ी घटनाएं अभिलेखों में पहुंची लेकिन चोरी की छोटी घटनाओं के खुलासे को तवज्जो नहीं दी गई। शहर समेत उझानी कस्बे में वाहन चोरों ने दहशत कायम की। उझानी में तो पांच महीने के दौरान आधा दर्जन से अधिक कारें और पिकअप चोरी हो गईं। वहीं, हाल ही में हजरतपुर के बबलू का शव फंदे पर लटका मिला। पुलिस ने मामला संदिग्ध बताकर दफन कर दिया लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि होने के बाद भी पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। उसहैत में गंगा में मिले तहजीब के शव का पुलिस ने घरवालों की शिकायत पर पोस्टमार्टम कराया तो उसकी भी हत्या किए जाने की बात उजागर हुई थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की और एफआर लगा दी। यही नहीं, आपराधिक मामलों की ऑनलाइन शिकायतों के निस्तारण में पीड़ितों के बयानों पर गौर नहीं किया जाता।
गेहूं और धान क्या, बच्चों का वजीफा भी खा गए घोटालेबाज
जिले में घोटाले भी कम नहीं हुए। करीब डेढ़ साल पहले गेहूं खरीद में दो करोड़ रुपये का घोटाला उजागर हुआ था। जांच पूरी कर अफसर आरोपियों पर कार्रवाई कर पाते, उससे पहले ही उन्हीं दिनों खाद घोटाले ने अफसरों की नींद उड़ा दी। खाद घोटाला भी गेहूं के बराबर रकम का था। दो साल पहले करीब एक करोड़ रुपये के धान घोटाला चर्चा का विषय बना। ऐसा नहीं कि तीनों घोटाले पुलिस के अभिलेखों तक नहीं पहुंच पाए, हकीकत सामने आने पर भी घोटालेबाज मौज कर रहे हैं। उड़द घोटाला भले ही करीब चार साल पुराना है लेकिन तीन करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले ने शिक्षा विभाग में तहलका मचा दिया था। समाज कल्याण विभाग के अफसरों, स्कूल-कॉलेज संचालकों समेत बैंकों के शाखा प्रबंधक भी नामजद किए गए लेकिन किसी की गिरफ्तारी तक नहीं हो पाई है। हालांकि पांच करोड़ से ज्यादा के स्टांप घोटाले की गाज अब तक संबंधितों पर गिर रही है।
सड़कों पर नजर नहीं आता एंटी रोमियो स्क्वायड
महिला उत्पीड़न के मामलों पर रोकथाम के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने शपथ लेने के बाद ही एंटी रोमियो स्क्वायड बनाने का जो निर्देश दिया, वह अमल में भी आया। हर कोतवाली और थाने में एंटी रोमियो स्क्वायड गठित कर दिया गया। शुरू के एक-डेढ़ साल तक स्क्वायड ने अच्छा काम किया। छात्राओं से लेकर महिलाओं ने राहत की सांस ली लेकिन अब सड़कों पर एंटी रोमियो स्क्वायड नजर नहीं आता।
बस, बिजली सप्लाई ने राहत पहुंचाई
जिला मुख्यालय पर बिजली सप्लाई की दशा में सुधार महसूस किया जाने लगा है। ओवरलोडिंग से ट्रिपिंग की समस्या से भी निजात मिली। अपवाद बतौर कुछेक समय को छोड़कर हकीकत पर गौर करें तो बिजली सुचारू रहने से उपभोक्ता भी राहत महसूस कर रहे हैं। कस्बों में बिल्सी, उझानी, दातागंज, बिसौली और सहसवान आदि समेत ग्रामीण इलाकों में भी बिजली सप्लाई के शेड्यूल ने फायदा पहुंचाने का काम किया है।
बोले लोग
सरकार ने जनता से जो वायदे किए थे, वह अभी तक पूरे नहीं हो सके हैं। उम्मीदें थी कि नई योजनाओं का लाभ आम जनता को मिल सकेगा। आज जनता से लेकर किसान परेशान हैं। लगातार मंहगाई बढ़ रही है। - लोकमन, सेवानिवृत्त कर्मचारी
प्रदेश सरकार ने जिस तरह से बदमाशों का सफाया किया है, उससे क्राइम का ग्राफ काफी हद तक गिरा है। बिजली व्यवस्था भी बेहतर हुई है। लेकिन बदहाल सड़कों पर अभी भी कोई काम नहीं हो सका है। - अशोक खुराना, व्यवसायी
प्रदेश सरकार ने कई योजनाएं संचालित की हैं लेकिन सरकार वह काम नहीं कर पायी, जिसकी अपेक्षा की जा रही थी। महंगाई पर नियंत्रण और सड़कों के गड्ढामुक्त होने का इंतजार है। - डॉ. कमला माहेश्वरी, शिक्षिका एवं साहित्यकार
सरकार से बहुत उम्मीद थी, लेकिन सरकार उतना अच्छा काम नहीं कर सकी। हालांकि उसने हालातों को सुधारने की कोशिश की है जो अच्छी बात है। शायद जो साल बचे हैं उनमें सुधार आ जाए। - सुषमा कथुरिया, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य