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Budaun News: ग्रामीण क्षेत्र में भी रोजगार परक बन रहीं महिलाएं

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सुदामा
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बदायूं। अब गांव की महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहीं हैं। पहले गांवों में महिलाओं की भूमिका घर और खेत तक ही सीमित मानी जाती थी, लेकिन अब समय बदल चुका है। महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि वे किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। कहीं कोई महिला डेयरी का कारोबार संभाल रही है तो कोई रेडीमेड कपड़ों की दुकान चला रही है। वहीं कई महिलाएं सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, पापड़-अचार बनाना, अगरबत्ती निर्माण जैसे कामों से घर बैठे आत्मनिर्भर हो रहीं हैं।
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निश्चय कर लिया जाए तो कुछ भी असंभव नहीं

गांव हजारा की सुदामा देवी ने बताया कि उन्होंने एक साल पहले उसावां कस्बे में दूध की डेयरी का काम शुरू किया था। शुरुआत में पूंजी की कमी और अनुभव की दिक्कतें आईं, लेकिन हिम्मत और मेहनत से सब आसान हो गया। अब उनकी डेयरी से रोजाना सैकड़ों लीटर दूध की बिक्री होती है, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है। सुदामा कहती हैं कि पहले सोचती थीं कि गांव की औरतें क्या कर सकती हैं, लेकिन अब लगता है कि अगर निश्चय कर लिया जाए तो कुछ भी असंभव नहीं।



रेडीमेड कपड़ों की दुकान खोलकर पेश की मिसाल

गांव पचदियोरा की राजेश्वरी देवी ने कस्बे में रेडीमेड कपड़ों की दुकान खोलकर नई मिसाल पेश की है। शुरुआत में लोगों ने उनकी पहल पर सवाल उठाए, मजाक उड़ाया कि महिलाएं दुकानदारी कैसे करेंगी, लेकिन राजेश्वरी ने सबकी बातों को नजरअंदाज कर काम पर ध्यान दिया। आज उनकी दुकान पर रोजाना कई ग्राहक आते हैं और उनका कारोबार लगातार बढ़ रहा है। राजेश्वरी गर्व से कहती हैं कि अगर महिलाएं ठान लें, तो गांव में भी रोजगार की कोई कमी नहीं है। बस मेहनत और ईमानदारी जरूरी है।

सुदामा

सुदामा

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