जिले में अब तक 34 डेंगू पॉजिटिव मिले
जिले में डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। अब तक 34 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। सबसे अधिक 22 मामले जगत ब्लॉक के बीबीपुर गांव में सामने आए हैं। इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों में डेंगू के मरीज मिल चुके हैं। वहीं उसावां में भी बृहस्पतिवार को एक पॉजिटिव मिला था।
बीबीपुर गांव में डेंगू के सबसे अधिक मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां जांच और बचाव कार्य कराए गए। यहां तक कि बरेली मंडल से भी टीमों ने आकर गांव का निरीक्षण किया। गांव में बुखार से पीड़ित लोगों की जांच के साथ मच्छरों की रोकथाम के लिए भी कदम उठाए गए, लेकिन अन्य जगहों पर ध्यान नहीं दिया।
डेंगू के साथ जिले में मलेरिया और वायरल बुखार के मरीज भी सामने आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बुखार होने पर कई लोग पहले स्थानीय स्तर पर उपचार करा रहे हैं। कुछ मरीज निजी चिकित्सकों और जांच केंद्रों का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आने वाले आंकड़ों के अलावा निजी स्तर पर कराई जा रही जांच की स्थिति भी बीमारी के वास्तविक फैलाव को समझने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
तीन दिन कैंप लगाकर टीम ने की जांच, नहीं मिला एक भी डेंगू-मलेरिया पीड़ित
मीरापुर गांव में स्वास्थ्य विभाग की ओर से 13, 14 व 15 सितंबर को लगाए गए स्वास्थ्य शिविर की जांच पर अब सवाल उठने लगे हैं। तीन दिन तक गांव में टीम मौजूद रही और बुखार से पीड़ित लोगों की जांच की गई, लेकिन विभाग की जांच में एक भी डेंगू या मलेरिया पॉजिटिव मरीज नहीं मिला। टीम को कुछ लोग बुखार से पीड़ित मिले, जिन्हें दवाएं देकर शिविर समाप्त कर दिया गया। इसके बाद गांव में दोबारा जांच या स्वास्थ्य टीम भेजने की जरूरत नहीं समझी गई।
गांव मीरापुर में शिविर समाप्त होने के बाद भी गांव में बुखार का सिलसिला जारी है। ग्रामीण मोहित, सोहन के अनुसार कई लोग अब भी बुखार से पीड़ित हैं और कुछ मरीजों का इलाज घर पर चल रहा है, जबकि कई लोग निजी अस्पतालों और दूसरे जिलों में इलाज करा रहे हैं। निजी लैब में कराई गई जांच में कुछ मरीजों में डेंगू और मलेरिया की पुष्टि होने की बात सामने आ रही है।
जब गांव में संक्रमण के लक्षण मौजूद थे और बुखार से पीड़ित लोग भी मिले थे तो स्वास्थ्य विभाग की जांच में एक भी डेंगू-मलेरिया मरीज क्यों नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से केवल खानापूर्ति की गई थी। इसकी वजह से महिला की मौत हुई है। अगर स्वास्थ्य विभाग इसको गंभीरता से ले लेता, तो महिला की मौत नहीं होती।