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परचूनी की दुकान है तो क्या... 70 रुपये दो, यह लो देसी शराब का पौवा

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उझानी (बदायूं)। देसी शराब के पौवे कहां मिलेंगे, यह पूछते ही हर कोई बता देगा कि ठेके पर चले जाओ लेकिन अगर अपने घर के पास ही पौवा खरीदना है तो दूर मत जाइए। थोड़ा ओवर रेट जरूर देना होगा पर परचूनी की दुकान पर यह आसानी से मिल जाएगा। साथ में नमकीन के पाउच, पानी की थैली और प्लास्टिक का गिलास की सुविधा भी मिल जाएगी। ऐसा ही नजारा शुक्रवार को यहां गद्दी टोला मोहल्ले में प्राथमिक विद्यालय के सामने देखने को मिला। दुकानदार ने न तो शिक्षा के मंदिर की अहमियत को समझी और न ही पुलिस का खौफ किया। उसे तो 70 रुपये में देसी शराब का पौवा बेचना है बस।
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शुक्रवार को गद्दीटोला मोहल्ले में परचून की जिस दुकान से किसी ग्राहक ने देसी शराब के पौवे खरीदे तो दुकानदार ने ग्राहक से 70 रुपये वसूलने के बाद यह और पूछ लिया कि प्लास्टिक का गिलास, पानी और नमकीन के पाउच चाहिए तो उसके पैसे अलग होंगे। ऐसा भी नहीं कि यहां देसी शराब की सरकारी दुकान नहीं है। तीन दुकानें होने के बाद भी गली-मोहल्लों में परचूनी की दुकानों पर देसी शराब के पौवे आसानी से कैसे मिल रहे हैं और धंधेबाजों को किसका संरक्षण प्राप्त है, यह तो पुलिस की जांच के बाद ही पता लगेगा लेकिन एक बात तो साफ है कि धंधेबाजों ने घर बैठे कमाई का जो फंडा अपनाया है, उससे शासन को राजस्व का नुकसान जरूर उठाना पड़ रहा होगा। सवाल तो इस बात को लेकर भी उठ रहा है कि धंधेबाजों ने एक दुकान के सामने प्राथमिक विद्यालय पर भी गौर नहीं किया है। स्कूल के बच्चों पर भी शराबियों का जमघट लगा रहने का बुरा असर पड़ेगा। इसीलिए पिछले दिनों मोहल्ले के ही लोगों ने दबी जुबान एक-दूसरे के सामने हकीकत बयां करनी शुरू कर दी थी।
...फिर पुलिस को हिरासत में लेना पड़ा दुकानदार
उझानी। गद्दी टोला मोहल्ले में परचूनी की दुकान पर देसी शराब के पौवों की बिक्री की भनक दोपहर में पुलिस को लगी तो कोतवाली से दो सिपाहियों को मौके की ओर दौड़ा दिया गया। पुलिस कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद उस दुकान को खोज निकाला, जहां शराब बिक रही थी। दुकानदार को हिरासत में ले लिया गया। उससे कोतवाली में पूछताछ हुई तो दुकानदार ने काफी हद तक हकीकत भी बयां कर दी।
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उझानी में पकड़ी जा चुकी है तस्करी की दो बड़ी खेप
उझानी। देसी और अंग्रेजी शराब हरियाणा और उत्तराखंड से यहां पहुंचती रही है। एक साल के अंदर पुलिस ने तस्करी की शराब की दो बड़ी खेप भी पकड़ी थीं। सबसे पहले पकड़ी गई तस्करी की अंग्रेजी शराब हरियाणा की थी तो तीन महीना पहले जिस वाहन में शराब मिली, वह देसी थी। मुख्य धंधेबाज तो पुलिस की पकड़ में नहीं आए लेकिन चालक और परिचालकों को जेल जाना पड़ा। तस्करी की शराब की खपत इलाके में होनी थी, यह बात जरूर सामने आ गई थी।
मामला संज्ञान में आया है। एक दुकानदार से पूछताछ की गई है लेकिन उसकी दुकान पर पुलिस कर्मियों को कुछ नहीं मिला है। जांच की जा रही है। अगर ऐसा पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
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- विनोद कुमार चाहर, कोतवाल।
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