कथा के अंतिम दिन तनयकृष्ण महाराज ने कहा कि सुदामा और कृष्ण का प्रसंग भी भगवान और भक्त के बीच अटूट रिश्ते का हिस्सा है। सुदामा को कृष्ण को क्या दे दिया यह तो सुदामा घर लौटते वक्त भी समझा पाया लेकिन प्रभु ने मित्रता की भी अनूठी मिसाल पेश कर दी। प्रभु की कृपा का नतीजा है कि जो सच्चाई के रास्ते पर चलने हैं, कभी कष्ट नहीं उठाते। भगवान जब भी किसी पर कृपा बरसाते हैं तो उसका कल्याण हो जाता है। चाहकर भी कोई उसे रोक नहीं सकता। कथा व्यास ने ध्रुव का प्रसंग भी सुनाया।
कथा के दौरान श्री ब्राह्मण सभा की ओर से अध्यक्ष किशनचंद्र शर्मा ने कथा व्यास को चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किया। सर्राफ प्रदीप गोयल ने दक्षिणा दी। आयोजकों में अमित प्रताप सिंह और संजीव गुप्ता ने तनयकृष्ण महाराज को अंगवस्त्र के साथ प्रतीक चिन्ह भेंट किया। कथा प्रेमियों में महिला और पुरुषों ने उन्हें यथा संभव भेंट प्रदान की। देर शाम तक चले धार्मिक कार्यक्रम में कथा व्यास ने राधा-कृष्ण से जुड़ा भजन सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।