फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Budaun News: यह कैसा रिवाज है परिंदों के शहर का... पंखों काे पता नहीं अंतिम उड़ान का

विज्ञापन
बिसौली में कवि सम्मेलन में मौजूद कविगण। संवाद - फोटो : संस्था
विज्ञापन
बिसौली। विमान दुर्घटना में मृत लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में कवि सम्मलेन का आयोजन हुआ। कवि नरेंद्र गरल ने कहा कैसा रिवाज है यह परिंदों के शहर का, पंखों काे पता नहीं अंतिम उड़ान का। कवि अभीक्ष पाठक ने पढ़ा कि आप क्या हैं ये बताने की जरूरत क्या है? शख्सियत आपकी बातों से नजर आती है।
विज्ञापन

कवि श्रीदत्त शर्मा ने कहा कि यूं तो जी लेंगे तुम्हारे बगैर हम, पर जी के क्या करेंगे तुम्हारे बगैर हम। कवयित्री प्रिया वशिष्ठ की पंक्तियां रहीं- मुझे रफ्तार तो बहुत पसंद है, पर घटनाओं से डरती हूं। कवि अचीन मासूम ने पढ़ा, चुनौती हो कठिन कितनी कदाचित वो नहीं डरते, वो अपनी प्राथमिकता में सदा निज देश को धरते। शहादत उन शहीदों की भुलाई जा नहीं सकती, लुटाते जो वतन पर जां वो मरकर भी नहीं मरते।
कवि आकाश पाठक ने पढ़ा- दुर्घटनाएं हो रही विमान हो चाहे ट्रेन, सरकारें कहां सो रही जनता है बेचैन। इससे पूर्व आयोजक आकाश पाठक व सभासद कृष्णा गुप्ता ने भाजपा जिला महामंत्री डाॅ. अरुण प्रकाश, इंस्पेक्टर हरेंद्र सिंह, मंडल अध्यक्ष सुनील सिंह, भाजपा नेता अमन मयंक शर्मा तथा कवियों क़ो प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। संचालन कवि सुनील शर्मा ने किया। इसके अलावा सुवीन माहेश्वरी, अहमद अमजदी, हरगोविंद पाठक, रमेश चंद्र शर्मा, ओजस्वी जौहरी आदि कवियों ने काव्य पाठ किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें