बदायूं। अनुमान लगाया जा रहा था कि जनवरी के पहले सप्ताह से शीतलहर विदाई लेने लगेगी, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ की बढ़ी सक्रियता के कारण यह अनुमान धरे रह गए। हालांकि, जनवरी के अंतिम सप्ताह में कुछ दिन अच्छी धूप खिलने से मौसम खुशनुमा हुआ था, लेकिन फरवरी का पहला सप्ताह खत्म होने के साथ मौसम का मिजाज बिगड़ गया है। शनिवार को भी शीतलहर का प्रकोप बना रहा। लगातार मौसम खराब रहने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
दो दिन पहले हुई बारिश और ओलावृष्टि के बाद से ठंडक और बढ़ गई है। बृहस्पतिवार को बारिश और ओलावृष्टि के बाद से ही ठंड बढ़ गई थी। शुक्रवार के बाद शनिवार को भी पूरा दिन बादल छाए रहे। धूप न निकलने और सर्द हवाओं के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। शनिवार को अधिकतम तापमान 18 और न्यूनतम नौ डिग्री के आस-पास दर्ज किया गया। सर्द हवाओं की रफ्तार 14 किमी के आसपास और आर्द्रता 82 फीसदी रही। शनिवार को पूरा दिन सर्द हवाओं के कारण वातावरण में गलन पैदा हो गई। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी के पहले सप्ताह में मौसम साफ होने का अनुमान कम ही है।
मौसम वैज्ञानिक डॉ. आलोक सागर गौतम का कहना है कि रविवार को भी बादल छाए रहने का अनुमान है। पहाड़ों पर बारिश और बर्फबारी के कारण मैदानी इलाकों में एक बार फिर से शीतलहर का प्रकोप बढ़ा है। पश्चिमी विक्षोभ एक बार फिर से सक्रिय हो गया है। इस कारण भी मौसम में उतार-चढ़ाव आ रहा है। सोमवार से मौसम में कुछ सुधार होने की उम्मीद है।
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बच्चों को निमोनिया, बुजुर्गों को बढ़ने लगी जोड़ों में दर्द की समस्या
बदायूं। मौसम बदलने, बार-बार बूंदाबांदी और वायु में नमी बढ़ने के कारण बच्चे निमोनिया और बुजुर्ग जोड़ों के दर्द की समस्या का शिकार हो रहे हैं। इन दिनों बाल रोग विशेषज्ञों और फिजियोथेरेपिस्ट के क्लीनिक पर मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अस्पताल की ओपीडी में भी रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। बदलते मौसम का सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। खर्दी-खांसी-जुकाम के साथ बुखार के रोगियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि बदलते मौसम में सावधानी बरतने और खान-पान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। खासकर बच्चे और बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी रहने की जरूरत है।
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डॉक्टरों की बात
बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। बदलते मौसम में बच्चे जल्दी बीमार हो जाते हैं। इस तरह का मौसम इन दिनों बना है उसके कारण बच्चे निमोनिया के शिकार हो रहे हैं। सर्दी-खांसी इन दिनों बच्चों में आम है। बच्चों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। उनको गरम पानी पिलाएं। पांच वर्ष तक के बच्चों का ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है। गर्म कपड़े पहनाकर रखें। सुबह और शाम के वक्त बच्चों को घर से बाहर न ले जाएं।
-डॉ. इत्तेहाल आलम, बाल रोग विशेषज्ञ
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सर्दियों के सीजन में जोड़ों की दर्द की समस्या आम बात है। इन दिनों एक बार फिर से तापमान गिरने और सर्द हवाएं शुरू होने के कारण बुजुर्गों में जोड़ों के दर्द की शिकायत बढ़ गई है। बुजुर्गों को सर्द मौसम में घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। व्यायाम की बात करें तो सुबह घर के अंदर ही हल्का व्यायाम करना चाहिए। फिजियोथेरेपी से बुजुर्गों को जोड़ों के दर्द की समस्या में काफी फायदा मिलता है। दर्द से बचने के लिए जोड़ों को ढककर रखना जरूरी है।
-डॉ. इमरान हुसैन, फिजियोथेरेपिस्ट