उझानी। आउटसोर्स सेवा निगम के गठन को मंजूरी के बाद कर्मचारियों में खुशी की लहर है। करीब 10 हजार रुपये के न्यूनतम वेतन पर कार्यरत कर्मियों को 20 हजार से कम वेतन नहीं मिलेगा। हालांकि श्रेणी प्रथम के कर्मियों को 40 का न्यूनतम पारिश्रमिक तय किया गया है।
प्रदेश सरकार के फैसले के बाद सरकारी विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों के चेहरे खिले नजर आए। नगर निकाय और बिजली विभाग आदि समेत कई और कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारी इसे लेकर आपस में विचार- विमर्श करते रहे। आउटसोर्स के कर्मचारियों ने बताया कि प्रदेश सरकार ने सेवा निगम का गठन करके उनके हितों की रक्षा की है। पारिश्रमिक वृद्धि से उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना भी नहीं करना पड़ेगा।
दरअसल, योगी कैबिनेट ने निगम के गठन को मंजूरी प्रदान करने के साथ आउटसोर्स कर्मियों जो सहूलियतें प्रदान करने की ओर कदम बढ़ाए हैं, उनमें पारिश्रमिक वृद्धि के अलावा उनसे प्रत्येक महीना 26 दिन की सेवा लेने, वेतन हर महीना की पांच तारीख तक खातों में अवमुक्त किए जाने, ईपीएफ और ईएसआई का अंशदान सीधे उनके खातों में पहुंचेगा। आरक्षण का लाभ भी आउटसोर्स कर्मियों को मिलेगा। प्रदेश सरकार ने सेवा निगम में न्यूनतम पारिश्रमिक की चार श्रेणियां बनाई हैं। पहली श्रेणी के कर्मियों को 40 हजार, दूसरी श्रेणी में 25 हजार तीसरी श्रेणी के कर्मियों को 22 तो चौथी श्रेणी के कर्मचारी कम से कम 20 हजार रुपये के हकदार होंगे। साथ ही सरकार की भर्ती कंपनियों पर भी नजर रहेगी।
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सरकार ने की कर्मचारियों के हित की रक्षा
- प्रदेश सरकार ने आउटसोर्स सेवा निगम का गठन करके हितों की रक्षा की है। अब तक उन्हें जो पारिश्रमिक प्राप्त होता था, वह काम के लिहाज से काफी कम था। सरकार से ऐसी ही उम्मीद थी। - अंकुर आर्य, बिजली विभाग
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घरेलू संसाधन जुटाने में नहीं होगी दिक्कत
आउटसोर्स सेवा निगम के गठन के बाद न्यूनतम वेतन का लाभ मिलने के साथ ही और भी कई फायदे होंगे। न तो हर साल एग्रीमेंट होगा और न ही कम पारिश्रमिक की वजह से घरेलू जरूरत के सामान की व्यवस्थाएं करने में दिक्कत होगी। - पवन कुमार, नगर पालिका परिषद
अंकुर आर्य।