पूरे दिन धूप के दर्शन नहीं हुए। सुबह कोहरे से लोगों का सामना हुआ। दिन में कोहरा छटा लेकिन बादल छाए रहे। शाम को फिर घना कोहरा छाने लगा। मौसम की बदमिजाजी से पारा लुड़ककर आठ डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच जाने से लोगों ने सिहरन महसूस की। छह किमी प्रति घंटा हवाएं चलीं। इससे लोग परेशान हो उठे। कोहरे और शीत लहर में लोगों को घरों में दुबकने को मजबूर होना पड़ा। सरकारी दफ्तरों, घरों और दुकानों पर दिनभर हीटर चलते या कोयले की अंगीठियां धधकतीं रहीं। सार्वजनिक स्थानों पर गरीबों ने अलावों का सहारा लिया।
सुबह जब लोग सोकर उठे तो उन्हें महसूस हो गया कि आज का मौसम ठीक नहीं होगा। सुबह घना कोहरा था। घर से बाहर झांककर ही लोग फिर दुबक गए। अपराह्न 11 बजे कोहरा हटा तो शीत लहर के साथ बाद भी थे। लोगों की घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं हुई। फिर भी सरकारी कर्मचारी, दुकानदार और कामगार ही घर से बाहर निकले। बहुत जरूरी होने पर ही लोग बाजार गए। सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा। बाजार भी बेरौनक रहे। बृहस्पतिवार को जिस प्रकार चटक धूप निकली थी, उससे उलट शुक्रवार को सूरज के दर्शन तक नहीं हुए। लोगों को ठंड लौटने पर बेहद परेशानी का सामना करना पड़ा।