Water discharge can grow from Naraura barrage on Tuesday.
- फोटो : Water discharge can grow from Naraura barrage on Tuesday.
पहाड़ी और मैदानी इलाकों में बारिश के चलते गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। हालांकि, पिछले दो दिनों से नरौरा बैराज से गंगा में वाटर डिस्चार्ज काफी कम हुआ है। शनिवार को गंगा में 105345 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इसके बाद से गंगा में उफान है। नरौरा बैराज के रिकार्ड के मुताबिक छह दिन में बैराज से गंगा में 359039 क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है। इधर, नरौरा से वाटर डिस्चार्ज कम होने के साथ ही गंगा ने कटान तेज कर दिया है। मंगलवार को डिस्चार्ज बढ़ सकता है।
जिले में गंगा और रामगंगा में बाढ़ आने की वजह से 250 से ज्यादा गांव प्रभावित होते हैं। गंगा सहसवान, सदर तहसील और दातागंज के गांवों को प्रभावित करती हैं। वहीं राम गंगा सबसे ज्यादा दातागंज तहसील के गांवों में कहर बरपाती हैं। इस साल भी बाढ़ का सीजन शुरू हो चुका है। दोनों नदियां उफान पर हैं। गंगा उसहैत में जमीदाराना और सहसवान में नगला अजमेरी बांध पर कटान कर रही हैं। हालांकि, बाढ़ खंड के मुताबिक स्थिति अभी नियंत्रिण में है। गंगा का जलस्तर मीटर गेज पर 163.50 के ऊपर पहुंचने के बाद खतरा पैदा होता है। फिलहाल गंगा का मीटर गेज 162.30 के आसपास बना हुआ है। बाढ़ खंड ने संवेदनशील बांधों पर मरम्मत का काम पहले ही शुरू करा दिया है। इधर, नरौरा बैराज के अधिकारियों के मुताबिक हरिद्वार से सोमवार को गंगा में दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी 96 घंटे में नरौरा तक पहुंच जाएगा। इसके बाद नरौरा बैराज से गंगा में वाटर डिस्चार्ज बढ़ जाएगा। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार वर्मा के मुताबिक फिलहाल खतरे जैसी कोई स्थिति नहीं है।
छह दिन में वाटर डिस्चार्ज की स्थित
12 जुलाई- 23000
13 जुलाई- 59915
14 जुलाई- 95405
15 जुलाई- 105345
16 जुलाई- 44717
17 जुलाई- 30657
(क्यूसेक में)
उसहैत में पथरामई तक पहुुंचा पानी
उसहैत। गंगा में उफान के बाद भी बाढ़ खंड लापरवाह है। गंगा ने उसहैत में भुंडी और पथरामई के पास बांध पर कटान शुरू कर दिया है। गंगा का पानी पथरामई गांव तक पहुंच गया है। यहां गंगा जमीदाराना बांध के पास से होकर बह रही हैं। बांध पर कटान होने से क्षेत्र के गांव भकरी, भकरौली, कोनका नगला, धोबी नगला, नगला बछेली, बहेटी, अहमद नगला, रायपुर, कदम नगला और पंखिया नगला गांवों के लिए खतरा पैदा हो गया है। करीब चार साल पहले भी गंगा ने इन गांवों में तबाही मचाई थी।