पट्टों से कब्जा हटवाने के नाम पर गलत आख्या देने का आरोप
सांसद तक पहुंची शिकायत तो तहसील दिवस के बाद हुई सुनवाई
शिकायत का गलत निस्तारण करने पर पीड़ितों ने जिलाधिकारी को अवगत कराया है कि एसडीएम ने उनकी शिकायत का निस्तारण नहीं किया, बल्कि दबंगों को प्रश्रय देने जैसे हालात बनाते हुए गलत आख्या दे दी है।
विकासखंड बिसौली के ग्राम सिचौली निवासी रामगुलाम और रामौतार को आवासीय पट्टे मिला है। इस पट्टे पर दबंगों का कब्जा है। कब्जे की शिकायत तहसील दिवस के माध्यम से जिलाधिकारी से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। बाद में पीड़ितों ने सांसद धर्मेंद्र यादव के माध्यम से पुन: जिलाधिकारी से शिकायत की। जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लेकर उपजिलाधिकारी बिसौली को फिर कार्रवाई का निर्देश दिया। पीड़ितों का आरोप है कि उप जिलाधिकारी ने बावजूद इसके उनका पट्टा कब्जा मुक्त तो नहीं कराया, बल्कि जिलाधिकारी को आख्या भेज दी कि पट्टेदारों को तीन बार कब्जा दिलाया जा चुका है। जबकि मौके पर पीड़ितों को अभी तक कब्जा दिलाने का एक भी प्रयास नहीं हुआ है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि तहसील के अधिकारियों व कर्मचारियों की कब्जेदारों से साठगांठ है और बिना कोई कार्रवाई किए ही निस्तारण-पत्र के रूप में आख्या जिलाधिकारी को भेज दी है। शिकायत कर्ताओं ने जिलाधिकारी को भेजे प्रार्थना पत्र में कहा है कि पूरे मामले की जांच कराकर पट्टों पर कब्जा दिलाने के साथ ही गलत आख्या देने पर भी कार्रवाई की जाए।
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पुराना मामला है यह तो हो सकता है कि उन्होंने इस संबंध में डीएम को आख्या भेजी होगी। उन्हें केवल इतना याद है कि रामगुलाम अकेला गांव में रहता और रहने को मकान भी है। पट्टा की भूमि खाली पड़ी है। वह खुद ही इसमें कोई निर्माण कार्य नहीं करा रहा है। बाकी रामऔतार का भी का मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं है।
- गुलाब चंद्र, एसडीएम, बिसौली