बदायूं। जनपद में पंजीकृत व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच कराने के लिए अब 60 किलोमीटर दूर बरेली की दौड़ लगानी पड़ेगी। नए नियम से ट्रांसपोर्टरों, ई-रिक्शा चालकों और वाहन चालकों को समय, ईंधन और टोल का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा, इससे वे बरेली जाने से कतरा रहे हैं, जिससे उनकी परेशानी बढ़ सकती है। जिले में करीब 12 हजार वाहन पंजीकृत हैं। बता दें कि आठ दिन में केवल 12 वाहन स्वामियों ने ही बरेली जाकर अपने वाहनों की फिटनेस जांच कराई है।
एक जनवरी से मैनुअल फिटनेस जांच बंद कर ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) के माध्यम से अनिवार्य कर दी गई है। वहां वाहनों की फिटनेस जांच अब ऑटोमेटिक फिटनेस मैनेजमेंट सिस्टम (एएफएमएस) पर की जाएगी। निजी क्षेत्र में एटीएस बरेली को जिम्मेदारी दी गई है। वाहन स्वामियों को अब पहले ऑनलाइन स्लॉट बुक कराना होगा। इसके बाद एटीएस पर जाकर फिटनेस जांच करानी होगी।
जिले के लिए सबसे नजदीकी फिटनेस सेंटर बरेली बाइपास एटीएस प्राइवेट लिमिटेड केंद्र है। ऐसे में अब जिले में फिटनेस जांच कराने वाले पंजीकृत 12 हजार वाहन स्वामियों को समय, ईंधन और टोल का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा, जिससे उनकी परेशानी बढ़ सकती है। वहीं, अगर दिए स्लॉट की बुकिंग वाले दिन नहीं पहुंच पाए तो फिर से वही प्रक्रिया अपनानी होगी। अगर वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं होगा तो पहली बार पकड़े जाने पर पांच हजार रुपये तो दूसरी बार पकड़े जाने पर 10,000 रुपये का चालान किया जाएगा।
ई-रिक्शों की फिटनेस जांच कराना होगा चुनौती
वैसे तो नए व्यावसायिक वाहनों को पंजीकरण के बाद आठ वर्ष तक हर दो साल पर और उसके बाद एक-एक वर्ष पर फिटनेस जांच कराने का नियम है। पेट्रोल व डीजल गाड़ियां तो जैसे-तैसे फिटनेस जांच कराने बरेली तक पहुंच जाएंगी, लेकिन ई-रिक्शा चालकों को अपने वाहन की फिटनेस जांच कराने जाना चुनौती साबित होगा। कारण, 60 किलोमीटर जाने में ई-रिक्शाें की बैटरी डिस्चार्ज हो जाएगी।
टूटी फिटनेस वाले वाहनों को बरेली तक ले जाना होगा जोखिम भरा
जिस वाहन की फिटनेस टूट गई है, उसको 60 किलोमीटर दूर ले जाना किसी जाेखिम से कम नहीं होगा। अगर रास्ते में ऐसे वाहन सड़क हादसे का शिकार होते हैं तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। इसको लेकर भी वाहन स्वामी चिंतित हैं।
सात से आठ हजार रुपये में होगी फिटनेस जांच
अब तक फिटनेस का काम एआरटीओ कार्यालय से ही होता आ रहा था, लेकिन एक जनवरी से नई व्यवस्था लागू कर दी गई है, जिससे तहत अब ऑटोमेटिक फिटनेस मैनेजमेंट सिस्टम पर कराई जा रही है। इसका सेंटर बरेली बनाया गया है। यहां सरकारी फीस जमा करके ही वाहन की फिटनेस जांच हो जाती थी, लेकिन अब सात से आठ हजार रुपये फीस देने के बाद भी दो से तीन दिन तक का समय फिटनेस जांच कराने में लग रहा है।
आठ दिन में दस वाहन ही पहुंचे बरेली
बरेली सेंटर से मिली जानकारी के अनुसार, आठ दिन में मात्र दस वाहन ही फिटनेस जांच कराने के लिए बरेली पहुंचे, जबकि बदायूं में 30 से 40 वाहनों की फिटनेस जांच हर रोज हुआ करती थीं। ऐसे में वाहनों की फिटनेस जांच न होने से अनफिट वाहन सड़क पर दाैड़ लगा रहे हैं। इससे हादसों में कमी आने की जगह बढ़ाेतरी होने की आशंका जताई जा रही है, जो चिंता का विषय है।
फिटनेस जांच के लिए वाहनों को बरेली भेजा जा रहा है। अभी शुरुती दौर है, जिससे लोग बरेली जाने से कतरा रहे हैं। बिना फिटनेस जांच के वाहनों को सड़क पर नहीं दौड़ने दिया जाएगा। बिना फिटनेस जांच पकड़े जाने पर पांच से दस हजार रुपये जुर्माना वसूला जाएगा। - हरिओम, एआरटीओ, बदायूं
एआरटीओ कार्यालय ।- फोटो : मृतक रामू ।