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बेमौसम बूंदाबांदी से बढ़ी  किसानों की चिंता  

Mon, 28 Mar 2016 12:34 AM IST
बदायूं, ब्यूरो
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गेहूं फसल - फोटो : अमर उजाला
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दैवीय आपदा की हैट्रिक बनी तो किसानों को होगा सर्वाधिक नुकसान
 बेमौसम तापमान में गिरावट और कुछेक स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी ने गेहूं उत्पादकों को परेशानी में डाल दिया है। काश्तकार परेशान भी क्यों न हों, उन्हें पिछले दो साल में मौसम ने ही कंगाली के दौर में पहुंचा दिया। हालांकि इस बार गेहूं की फसल ठीकठाक है लेकिन मौसम का मिजाज अन्नदाता के विपरीत रहा तो भारी नुकसान होगा। सूखे हलक के साथ गेहूं उत्पादक अब आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं कि कहीं अनर्थ न हो जाए।
खेतों में पक ी गेहूं की फसल पर संकट के बादल की शुरुआत यूं तो पिछले सप्ताह भी हुई लेकिन बूंदाबांदी के साथ तेज हवाएं नहीं चलीं। जब पछवा हवाएं चलीं तो आसमान साफ नजर आने लगा था। शनिवार रात मौसम का मिजाज बदलते ही बूंदाबांदी शुरू हो गई। बूंदाबांदी कोई खास नहीं हुई है फिर भी किसानों को अनहोनी की आशंका के बीच सोचने को मजबूर कर दिया है कि मार्च-अप्रैल में बरसात के साथ ओलावृष्टि हुई तो गेहूं की बालियां तिनके बनकर बिखर जाएंगीं। गेहूं के दाने बटोरना भी मुश्किल हो जाएगा। बता दें कि पिछले दो साल से ये दिन वैसे भी किसानों पर भारी पड़ते आए हैं। दोनों साल लगातार दैवीय आपदा का सामना करना पड़ा था। दैवीय आपदा की हैट्रिक गेहूं उत्पादकों सर्वाधिक नुकसान की चपेट में पहुंचा सकती है।
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सरसों के उत्पादन में भी गिरावट
उझानी। सरसों की फसल पककर घरों में पहुंच चुकी है लेकिन इस बार उत्पादन पहले के मुकाबले करीब 20 फीसदी तक कम रहा। उत्पादन में गिरावट को लेकर किसानों की मानें तो दिक्कत मौसम में बार-बार बदलाव की वजह से हुई। फसल अच्छी थी लेकिन कटाई के दौरान पछवा हवा चलने से दानों की हवा ही निकल गई। सरसों के उत्पादन में गिरावट की भरपाई के लिए उनके पास महज गेहूं की अच्छी पैदावार ही सहारा बन सकती है।
सदमें में कई किसानों ने गवांई थी जान
उझानी। पिछले साल दैवीय आपदा की भेंट चढ़ी गेहूं की फसल की वजह से किसानों को इस कदर गहरा सदमा पहुंचा था कि जिले में कई किसानों को जान से हाथ धोना पड़ गया था। हालांकि नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने आपदा पीड़ितों को कुछ हद तक राहत राशि के चेक भी मुहैया कराए लेकिन सबकुछ ठीकठाक नहीं हो पाया। राहत राशि के चेकों से लागत की रकम भी नहीं निकल पाई थी।
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मौसम का-मिजाज पूरी तरह ठीक नहीं है। बरसात की आशंका बनी हुई है लेकिन ओलावृष्टि के चांस काफी कम हैं। फिलहाल की बूंदाबांदी से कोई खास नुकसान नहीं है लेकिन कटाई लेट हो सकती है। किसानों को नफा-नुकसान अब मौसम के मिजाज पर ही निर्भर करेगा।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक।
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