बदायूं। विशेष प्रगाढ़ पुननिरीक्षण (एसआईआर) अभियान की समय सीमा नजदीक आते ही जिले में बीएलओ पर दबाव बढ़ता जा रहा है। हालात यह हैं कि कई महिला बीएलओ को रातभर जागकर काम करना पड़ रहा है। लगातार फॉर्म भरने, घर-घर सर्वे करने और रिपोर्ट तैयार करने के कारण उनकी नींद तक पूरी नहीं हो पा रही। थकान और तनाव का असर इतना बढ़ गया है कि कुछ महिला बीएलओ दवा खाकर काम करने को मजबूर हो गईं हैं।
एसआईआर के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य प्रदेश भर में चल रहा है। बदायूं जिले में 42 लाख फॉर्म बांटने, भरवाने और जमा करने की जिम्मेदारी बीएलओ पर है। अधिकारियों की ओर से लगातार फोन, बैठकें और समय पर काम पूरा करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। निर्धारित समय सीमा के भीतर लक्ष्य पूरा न होने की स्थिति में फटकार का डर बना रहता है।
इस दबाव के बीच महिला बीएलओ मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित हो रहीं हैं। कई महिला बीएलओ का कहना है कि सुबह से देर रात तक फॉर्म भरने और घर-घर सर्वे का काम चलता रहता है। घर लौटने के बाद भी उन्हें डाटा एंट्री और फॉर्म व्यवस्थित करने में घंटों लग जाते हैं। इस वजह से वे अपने परिवार को समय नहीं दे पा रहीं हैं।
महिला बीएलओ प्रेमवती बताती हैं कि फॉर्म भरने में अब तो उनके बच्चे और पति भी मदद करने लगे हैं, ताकि काम किसी तरह समय पर पूरा हो सके। बीएलओ रामवती ने बताया कि लगातार भागदौड़, तनाव और नींद पूरी न होने से उनकी सेहत भी बिगड़ने लगी है। सिरदर्द, कमजोरी और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। कई तो दर्दनाशक या अन्य दवाएं खाकर फील्ड में निकलने को मजबूर हैं, क्योंकि काम नहीं रोक सकतीं।
नींद पूरी नहीं, थकान से आने लगते हैं चक्कर
उसावां। बीएलओ नीलम जौहरी ने बताती हैं कि सुबह छह बजे से घर-घर जाकर एसआईआर फॉर्म भरना शुरू कर देती हैं और देर रात 11 बजे तक काम करती रहती हैं। उन्होंने कहा कि इतना काम है कि नींद पूरी ही नहीं हो पाती। रात में फॉर्म चेक करने बैठती हूं तो कई बार चक्कर आने लगते हैं। अधिकारी फोन पर बार-बार याद दिलाते रहते हैं कि समय पर काम पूरा करो। बच्चों को ठीक से देख भी नहीं पा रही। संवाद
घर और फील्ड दोनों संभालना मुश्किल
इस्लामनगर। अंजू कहती हैं कि परिवार और काम का संतुलन बिगड़ गया है। सुबह से फील्ड में रहना, फिर घर आकर खाना, बच्चे सब पीछे छूट गए हैं। अब तो पति और बच्चे भी फॉर्म भरने में मदद करते हैं, नहीं तो समय पर काम पूरा ही नहीं होगा। पूरा मानसिक तनाव बढ़ गया है। संवाद
नीलम जौहरी