बदायूं। साल 2019 में जिले के लोगों के लिए कई उम्मीदें जगीं, लेकिन उनकी ये उम्मीदें पूरी नहीं हुईं। जिले के लोग पूरे साल इसी आस में लगे रहे कि ये उम्मीदें पूरी होंगी और जिले का विकास होगा। चाहे सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की बात हो, या फिर सौर ऊर्जा प्लांट की या फिर बिजली व्यवस्था में सुधार की, जनता की कोई आस पूरी नहीं हो सकी। पूरे साल भर लोग ऊबड़खाबड़ सड़कों पर परेशानियां झेलते रहे तो कूड़ा निस्तारण के लिए डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की योजना भी परवान नहीं चढ़ सकी। इन्हीं उम्मीदों के पूरा होने की हसरतों को लेकर ये पूरा साल गुजर गया।
-पीपीपी मॉडल पर सीएंडडीसी और एटूजेड ने नवंबर 2011 में गुलड़िया के पास उतरना ग्राम पंचायत के मजरा सहपुरा में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाना शुरू किया था। इसकेे शुरू होने के बाद में लोगों को उम्मीद थी कि शहर में कूड़े का निस्तारण हो जाएगा, लेकिन तमाम अड़चनें लग गईं। 2019 में जब शहर विधायक महेश चंद्र गुप्ता नगर विकास राज्यमंत्री बने, तो लोगों को उम्मीद जागी कि अब इस दिशा में काम तेजी से होगा, लेकिन उनकी ये उम्मीद पूरी नहीं हो सकी।
-शहरवासियों के लिए कूड़ा निस्तारण सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक कूड़ा सड़कों पर इधर उधर पड़ रहता था, जो काफी-काफी दिनों तक सफाई कर्मचारियों के द्वारा नहीं उठाया जाता था। छह माह पहले पालिका की तरफ से एक एनजीओ को डोर टू डोर कूड़ा उठाने की परमिशन दी गई थी। इसके बदले में प्रत्येक घर से 50 रूपये लिए जा रहे थे। कुछ माह ये योजना ठीक चली। सड़कों से कूड़ा नदारद होने लगा। लेकिन पिछले माह से ये योजना दम तोड़ गई और घरों से कूड़ा उठना बंद हो गया। जिससे फिर से सड़कों पर कूडा दिखने लगा है।
-उसावां ब्लाक के गांव रिजौला में सोलर एनर्जी कारपोरेशन ऑफ इंडिया स्कीम के तहत सौर ऊर्जा प्लांट प्रस्तावित है। जो करीब दो अरब 20 करोड़ की लागत से बनना था। इसके लिए जमीन भी मुहैया कराई जा चुकी है। यहां से करीब 55 मेगावाट बिजली उत्पन्न की जाएगी। इस प्लांट को 2018 में पूरा होना था, लेकिन किन्हीं कारण ये पूरा नहीं हो सका। उम्मीद थी कि 2019 में ये पूरा हो जाएगा। इसके लिए दातागंज विधायक राजीव कुमार सिंह भी पूरी तरह से लगे रहे। लेकिन उसके बाद भी ये प्रोजेक्ट इस साल भी पूरा नहीं हो सका।
-केंद्र सरकार के निर्देश पर जिले में प्रत्येक पात्र व्यक्ति के घरों में शौचालय बनवाए जाने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद में तेेजी से शौचालय बनाए गए। लेकिन अधिकारी और कर्मचारियों की तरफ से कागजों में खेल कर दिया गया। यहां तक कागजों में जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया, जबकि मौजूदा स्थिति बिल्कुल भिन्न है। जिले में गत वर्षों में कितने शौचालय बने हैं। उनकी सही रिपोर्ट तक विभाग के पास नहीं है। अब विभाग द्वारा गांवों में नोडल अधिकारी भेजकर जानकारी एकत्र कराई जा रही है, तो कई परिवार ऐसे मिल रहे हैं, जो पात्रता की श्रेणी में लेकिन उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।
-केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को निशुल्क बिजली कनेक्शन दिए जाने थे। लेकिन विभाग के द्वारा अभी करीब एक दर्जन मझरे ऐसे हैं, जहां पर लोगों को सौभाग्य योजना का लाभ नहीं मिल सका है। और लोग अभी भी रात में अंधेरे में अपना समय काटने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
-जिले में 1602 प्राथमिक और 656 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। जिनमें कई स्कूलों की चहारदीवारी तक नहीं है। जिसकी वजह से छुट्टा जानवर स्कूलों में आ जाते हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। उम्मीद थी कि इस साल सभी स्कूलों की चहारदीवारी हो जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हालांकि पिछले माह से चहारदीवारी कराने का काम कुछ स्कूलों में शुरू हुआ है।