-एक साल में 45 किसान गोष्ठियां,
-11,81,250 रुपये का बजट खपाया
-किसानों को नहीं पता कब लगे मेले
आजादी के बाद देश और प्रदेश में जो भी सरकार आई सभी ने किसानों को खुशहाल बनाने के दावे किए। उनकी तरक्की के लिए कई योजनाएं बनीं। मगर दफ्तरों में बैठे अधिकारियों और कर्मचारियों की मनमानी के चलते न तो सरकारी योजनाएं ठीक से लागू हुईं और न ही किसानों को उनका फायदा मिला। सरकार से जुड़े नेता और अफसर किसानों के खुशहाल होने के दावे करने से नहीं थकते हैं। जबकि विरोधी दलों के नेता किसानों को आर्थिक स्थिति सुधारने के दावे करते हैं। मगर सिस्टम सुधारने को कोई तैयार नहीं है।
जिले में करीब 427000 किसान हैं। इनके लिए कई सरकारी योजानाएं संचालित हैं। मगर हकीकत में सारी योजनाओं का लाभ किसानों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाता है। बीज, कीटनाशक, दवाएं आदि के लिए किसान विभागों के चक्कर लगाकर परेशान हैं। कृषि विभाग प्रचार-प्रसार के लिए गोष्ठियां और मेलों का आयोजन करता है। विभाग की मानें तो पिछले एक साल में कुल 45 किसान गोष्ठी आयोजित की गईं। इन गोष्ठियों पर 11,81,250 रुपये खर्च हुए। मगर किसानों को इन कृषि गोष्ठियों और मेलों का कोई फायदा नहीं मिला। हर गोष्ठी में गिने चुने ही किसान बुलाए गए, लेकिन उनकी बढ़ी संख्या दर्शाकर बजट ठिकाने लगा दिया गया।
अब तक भी नही हुआ मृदा परीक्षण
बदायूं। मृदा परीक्षण के तहत लिए जिले से 90892 स्थानों पर मिट्टी का परीक्षण करने का लक्ष्य था। इनमें से 208000 किसानों को मृदा स्वस्थ कार्ड जारी किए जाने थे, लेकिन अब तक 32203 किसानों को डिजिटल और 12407 किसानों को मैन्युअल मृदा कार्ड दिए गए है। हालांकि कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ये कार्ड सितंबर तक बांटे जा सकते हैं।
गोष्ठी पर कितना खर्च हुआ-2016-17
योजना का नाम गोष्ठियां खर्च प्रति गोष्ठी कुल खर्च
तिलहन योजना 15 15000 25000
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 15 13750 206250
कृषि सूचना तंत्र योजना 15 50,000 7,50000
2016-17 में मेलों पर खर्च
आत्मा योजना में दो लाख
कृषि सूचना तंत्र में 7.50 साख
प्रदर्शन में करीब तीन लाख
कुल खर्च 2431250
किसानो से बात
कृषि विभाग की किसी भी योजनाओं की जानकारी नहीं मिलती है, और न ही हमें किसी मेले का पता चलता है। बीज, कीटनाशक आदि के लिए तो कई चक्कर लगाने पड़ते हैं।
- केशव वर्मा, किसान
कृषि विभाग की ओर से किसी योजना का लाभ नहीं मिला है। यहां के अधिकारी टाल-मटोल करते रहते हैं। ऐसे किसानों को बहुत दिक्कत होती है।
- मुन्ना लाल, किसान
पांच-छह दिनों से कृषि विभाग कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। कहीं से कोई जानकारी तो ठीक से मिलती नही है। सहायता करना तो दूर की बात है।
- जय पाल, किसान
मेला कहां लगता है, और क्या होता है इसकी जानकारी आम किसान को नहीं मिलती है। बीज के लिए भी कई दिनों से विकास भवन और कृषि विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। इसके बाद भी कोई जानकारी नहीं मिलती है।
- लोकीराम, किसान