बदायूं। रूस-यूक्रेन विवाद की वजह से जिले के करीब 10 छात्र-छात्राएं यूक्रेन में फंसे थे। इनमें से एक छात्र आधी रात में बदायूं आ जाएगा। कुछ रोमानिया तक आ गए हैं पर अभी उन्हें भारत आने को फ्लाइट नहीं मिली है। इससे उनके परिवार वाले मायूस हैं। परिवार लगातार जिला प्रशासन व अन्य अधिकारियों के संपर्क में हैं।
जिला प्रशासन के पास उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जिले के करीब आठ छात्र व दो छात्राएं यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें से कई अब भी यूक्रेन में हैं तो कुछ रोमानिया पहुंच चुके हैं। इनमें भी बदायूं निवासी अयाज सबसे भाग्यशाली है। वह रोमानिया रविवार को ही पहुंच गया था। दूतावास अधिकारियों से संपर्क के सहारे वहां से
फ्लाइट से दिल्ली आया और फिर वहां अयाज को उनके भाई मिल गए। उनके साथ वह सोमवार शाम दिल्ली से कार से घर रवाना हो गए हैं। अयाज रात में ही किसी वक्त घर आ जाएंगे।
इधर, इस्लामनगर निवासी तीनों छात्र तौहीद, इमरान और ओसामा यूक्रेन से प्राइवेट बस करके एक हजार किमी दूर हंगरी को निकल चुके हैं। वहां से फ्लाइट से दिल्ली आएंगे। बाकी छात्र छात्राएं अभी यूक्रेन या रोमानिया में फंसे हैं। डीएम दीपा रंजन ने बताया कि जिला प्रशासन अभिभावकों के संपर्क में है।
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सड़कों पर शव देखकर दहला दिल... आनंद ने साथियों संग भागकर बचाई जान
बदायूं। यूक्रेन पर रूस के हमले तेज होते जा रहे हैं। शहर के सिविल लाइंस निवासी राघवेंद्र यादव के बेटे आनंद यादव यूक्रेन के खारकीव शहर में फंसे हैं। रविवार को रूसी सेना ने मिसाइल से हमले किए। सड़कों पर शव देखकर आनंद का दिल दहल गया। साथियों के साथ भागकर जान बचाई। आनंद ने खारकीव के हालात परिवार वालों को बताए। परिवार वाले उसकी सकुशल वापसी की ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं।
सोमवार को आनंद के पिता राघवेंद्र ने डीएम दीपा रंजन से मुलाकात कर बेटे की सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई। डीएम ने हर संभव मदद का भरोसा दिया। राघवेंद्र ने बताया कि छह माह के बाद बेटे को पढ़ाई पूरी कर घर लौटना था, लेकिन उससे पहले ही यूक्रेन और रूस के बीच जंग छिड़ गई। बेटे ने बात करने पर बताया कि खारकीव में सड़कों पर कई जगह शव पड़े हैं। मिसाइल हमलों के कारण इमारते ध्वस्त हो चुकी हैं। रविवार रात रूसी सेना उसी इलाके में घुस आई जहां वह रहता है। सड़क पर शव पड़े देख कर वह भयभीत है। रूसी सेना के रिहायशी इलाके में घुसने और लोगों को पीटने के साथ फायरिंग करने पर वह लाइट बंद कर दोस्तों के साथ वहां से भाग निकला। अब सुरक्षित है लेकिन खतरा बना हुआ है।
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आकाश ने बताया-रोमानिया बॉर्डर तक रेल सेवा शुरू, मगर सफर आसान नहीं
वजीरगंज के बगरैन निवासी राजेश गुप्ता भी यूक्रेन में फंसे अपने बेटे आकाश गुप्ता को लेकर परेशान हैं। सोमवार को भी उन्होंने आकाश से बात की। आकाश ने पिता को वहां के ताजा हालात के बारे में बताया। उसने यह भी बताया कि रोमानिया बॉर्डर तक रेल सेवा तो शुरू की गई है, लेकिन सफर संभव और सुरक्षित नहीं है। रूसी सेना कब इस रेल को निशाना बना ले कहा नहीं जा सकता। रेल से रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचने को लेकर भी लोगों में मारामारी मची हुई है।
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धमाकों की गूंज से नहीं आती इस्लामनगर के छात्रों को नींद
इस्लामनगर कस्बे के तौहीद आलम, ओसामा और इमरान यूक्रेन की डनिप्रो स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। इन दोनों के पास रोमानिया या हंगरी तक सुरक्षित पहुंचने का कोई साधन नहीं है। हंगरी की यहां से दूरी करीब एक हजार किमी है। तीनों बंकर में रह रहे हैं। रात में धमाकों के बीच नींद भी नहीं आती है। यहां कई और भारतीय छात्र भी सुरक्षित निकलने का इंतजार कर रहे हैं। युद्ध लंबा खिंचने की आशंका के बीच छात्रों के परिवारवालों की चिंता बढ़ती जा रही है। परिवार के लोग न्यूज चैनलों के जरिये यूक्रेन के हालात पर नजर रख रहे हैं।
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रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचा दानिश, भूखा रहना पड़ा
फैजगंज बेहटा थाने के गांव सीकरी निवासी सादिक खान के बेटे दानिश को सोमवार को भूखा रहना पड़ा। किसी तरह से दानिश रोमानिया बॉर्डर तक तो पहुंच गया है, लेकिन अभी वह बॉर्डर पार नहीं कर पाया है। उसके पास रुपये नहीं हैं। एटीएम भी काम नहीं कर रहे। खाने-पीने की भी समस्या पैदा हो गई है। सोमवार को उसे भूखा रहना पड़ा। बॉर्डर कुछ समय के लिए खोला जाता है। सोमवार को वह भूखा था तो बॉर्डर पर कुछ भारतीयों ने उसको खाने के लिए चावल दिए। दानिश ने समस्याओं के बारे में परिवार वालों को बताया। यह भी बताया कि जल्द वह बॉर्डर पार कर लेगा।
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पेट्रोल पंप के शेड में रात गुजारी, प्रतीक्षा फिर यूक्रेन पहुंचीं
बिल्सी के मोहल्ला नंबर एक निवासी अवधेश मिश्रा की बेटी प्रतीक्षा मिश्रा कई किमी पैदल रास्ता तय करने के बाद रविवार शाम किसी तरह से रोमानिया बॉर्डर तक पहुंच गई, लेकिन यहां भी हालात काफी खराब होने के कारण प्रतीक्षा को फिर से लौटना पड़ा। प्रतीक्षा ने अपनी सहेली के साथ रात एक पेट्रोल पंप के यात्री शेड में बिताई। भूखा भी रहना पड़ा। रोमानिया बॉर्डर पर हजारों लोगों की भीड़ होने के कारण बॉर्डर पार करना संभव नहीं हो सका तो प्रतीक्षा को वापस पैदल ही यूक्रेन स्थित हॉस्टल लौटना पड़ा। पिता अवधेश मिश्रा समेत परिवार वाले प्रतीक्षा को लेकर चिंतित हैं।
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अब सुरक्षित है मुहिता, रोमानिया एयरपोर्ट पर बारी का इंतजार
शहर के मोहल्ला चौधरी सराय निवासी आरिफ हुसैन की बेटी मुहिता सैफी भी यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद यहां हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। भारतीय छात्र-छात्राओं के पास खाने-पीने का सामान भी खत्म हो रहा है। बिजली सप्लाई ठप होने से एटीएम आदि भी नहीं चल रहे। इस बीच मुहिता किसी तरह से बॉर्डर पार कर रोमानिया में प्रवेश करने में कामयाब हो गई हैं। मुहिता ने कॉल पर परिवार वालों को बताया कि अब वह पूरी तरह सुरक्षित है। एयरपोर्ट पर अभी ज्यादा भीड़ है। उसकी भारत वापसी का नंबर जल्द आने वाला है। संवाद
अयाज अंसारी अपने भाई व दोस्त के साथ दिल्ली से बदायूं लौटते हुए। संवाद- फोटो : BADAUN