जिले में भूगर्भ जलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। वाटर रिचार्जिंग के बेहतर इंतजाम नहीं किए गए तो जिले का एक बड़ा हिस्सा रेगिस्तान बन सकता है। भूगर्भ जल सर्वेक्षण आयोग की टीम की सर्वे रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ है। इसी के चलते उझानी और कादरचौक को डार्क जोन घोषित कर दिया गया है। यहां नए हैंडपंप लगाने और रिबोर करने पर रोक लगा दी गई है।
इन दोनों ब्लाकों के अधिकतर गांवों में हैंडपंप खराब हैं या फिर पानी नहीं दे रहे हैं। इसकी मुख्य वजह भूगर्भ जलस्तर का नीचे खिसकना है। जलस्तर नीचे चले जाने से जिले में करोड़ों रुपये खर्च करके से लगाए गए हैंडपंप बेकार पड़े हैं।
जिले के सहसवान, इस्लामनगर, अंबियापुर और आसफपुर पहले ही डार्क जोन घोषित किए जा चुके हैं। सहायक अभियंता लघु सिंचाई कामेंद्र सिंह ने बताया कि शासन से बाद में ब्लाक आसफपुर को डार्क जोन से बाहर कर दिया गया था। इस एरिया में बोरिंग पर लगी रोक हटाने का निर्देश जारी हो चुका है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक वर्ष 1986 में यूनीसेफ योजना के तहत गांव-गांव में हैंडपंप लगाए गए थे ताकि पानी मयस्सर हो सके। अब तक ग्रामीण अंचलों में 37,285 हैंडपंप लगाए गए हैं। हैंडपंपों की मरम्मत की जिम्मेदारी एक अप्रैल 2002 से ग्राम पंचायतों को सौंप दी गई थी, लेकिन ग्राम प्रधानों के रुचि न लेने से 1073 हैडपंप खराब हैं।