नगर के महाराणा प्रताप राजकीय स्तानकोत्तर महाविद्यालय प्रशासन ने
महाविद्यालय के विकास के लिए 14 करोड़ से ज्यादा का प्रस्ताव
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को भेजा है।
राजकीय महाराणा प्रताप
स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना को करीब दो दशक हो चुके हैं। इस वक्त
महाविद्यालय में स्नातक स्तर पर हिंदी, अंग्रेजी, समाजशास्त्र,
अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, इतिहास तथा स्नातकोत्तर स्तर पर हिंदी,
समाजशास्त्र और राजनीति शास्त्र की ही कक्षाएं संचालित हो रही हैं।
प्रभारी
प्राचार्य डॉ. रतनदीप शर्मा ने बताया कि उन्होंने महाविद्यालय के विकास को
इंस्ट्ीट्यूशन प्लान अनुदान के तहत 14 करोड़ से अधिक का प्रस्ताव यूजीसी
को भेजा है। प्रस्ताव में स्नातक स्तर पर बीएससी-बीकॉम की कक्षाएं शुरू
करने के साथ ही बीबीए, बीसीए और एमबीए की मान्यता दिए जाने की मांग की है।
प्राचार्य ने बताया कि इसके अलावा महाविद्यालय में ई-लाइब्रेरी खोले जाने
को डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव है, जबकि स्नातकोत्तर स्तर पर अलग भवन को 3.25
करोड़ रुपये मांगे हैं। ई-लाइब्रेरी के लिए महाविद्यालय में अलग से एक
कंप्यूटर सेंटर खोला जाएगा।
इसमें विद्यार्थियों के लिए जरूरत की सभी
पुस्तकें ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगी। कैंपस में वाई-फाई की सुविधा रहेगी।
राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत इसकी मांग की गई है। लाइब्रेरी
भवन को 1.10 करोड़ का प्रस्ताव रखा गया है।
लाइब्रेरी है पर पुस्तकालय अध्यक्ष नियुक्त नहीं
महाविद्यालय
में पुस्कालय तो है पर आज तक यहां पुस्तकालय अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई
है। लिहाजा, स्टूडेंट को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। मात्र एक महिला
लिपिक ही हैं।