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Budaun News: महाराणा प्रताप राजकीय डिग्री कॉलेज में 2000 विद्यार्थियों पर दो शिक्षक

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बिल्सी। महाराणा प्रताप राजकीय पीजी महाविद्यालय में वर्तमान में करीब दो हजार से अधिक स्टूडेंट हैं। प्रवक्ताओं के 14 पद स्वीकृत हैं पर पढ़ाने के लिए प्राचार्य समेत दो ही शिक्षक हैं। छात्रों की संख्या के सापेक्ष शिक्षक न होने के कारण कक्षाएं संचालित नहीं हो पा रही हैं। प्राचार्य जब प्रशासनिक कार्य में व्यस्त होते हैं तब सिर्फ एक ही शिक्षक पर पूरी जिम्मेदारी होती है।
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कॉलेज की स्थापना को करीब 30 वर्ष होने जा रहे हैं, लेकिन अब तक स्नातक एवं परास्नातक स्तर पर कला संकाय की ही कक्षाएं संचालित हो रहीं हैं, जबकि जिले में इसके बाद स्थापित हुए महाविद्यालय में सभी संकायों में छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। क्षेत्र की जनता कॉलेज में गृह विज्ञान, बीएससी और बीकॉम की कक्षाओं संचालित कराए जाने को लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से लगातार मांग करती चली आ रही है। अब तक इस समस्या की ओर किसी ने गंभीरता से विचार नहीं किया है। इससे अभिभावकों में रोष है।

यह है महाविद्यालय का अतीत
जिले के पहले महाराणा प्रताप राजकीय महाविद्यालय में स्नातक स्तर पर 594 सीट हैं। साल 1995-96 में क्षेत्र के तत्कालीन विधायक भोलाशंकर मौर्य के प्रयासों के चलते तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा ने राजकीय महाविद्यालय की स्थापना को हरी झंडी दी थी। थाने के समीप जिला पंचायत की जमीन पर महाविद्यालय भवन का निर्माण कराया गया।
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वर्ष 2002 में प्रदेश की भाजपा सरकार में उच्चशिक्षा मंत्री रहे डॉ नरेंद्र कुमार सिंह गौर ने नवीन भवन का लोकार्पण करते हुए नए सत्र से बीएससी और बीकॉम की कक्षाएं संचालित करने की घोषणा की थी। उस वक्त महाविद्यालय में शिक्षक संख्या ठीक थी, लेकिन बाद में संख्या कम होती चली गई। विधायक हरीश शाक्य राजकीय महाविद्यालय में विज्ञान और वाणिज्य की कक्षाएं संचालित कराए जाने को लेकर मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षामंत्री से मिल चुके हैं।




राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पंकज कुमार सिंह का कहना है कि महाविद्यालय में प्रवक्ताओं के रिक्त पद के साथ ही अन्य व्यवस्थाओं को पूरा कराए जाने के लिए हर वर्ष उच्च शिक्षा विभाग को रिपोर्ट भेजी जाती है। इस वर्ष भी महाविद्यालय में कोई नया प्रवक्ता नहीं आया है।


व्यवस्था न होने से बदायूं में कर रहे पढ़ाई
बिल्सी के मोहल्ला के मोहल्ला संख्या दो निवासी छात्र वंश वार्ष्णेय का कहना है कि उक्त महाविद्यालय में बीएससी की पढ़ाई न होने के कारण उन्हें बदायूं जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।

बिल्सी निवासी अभिभावक पुरुषोत्तम शाक्य का कहना है कि बिल्सी के राजकीय महाविद्यालय के छोड़ कर जिले से सभी महाविद्यालय में बीएसएसी और बीकॉम की कक्षाएं संचालित की जा रही है। यहां के बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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