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UP News: बदायूं के दो कांवड़ियों की सड़क हादसे में मौत, गंगाजल लेने हरिद्वार जा रहे थे दोनों दोस्त

Mon, 21 Jul 2025 01:43 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

कांवड़ लाने के लिए बाइक से हरिद्वार जा रहे बदायूं के उसावां कस्बे के दो दोस्तों की बिजनौर में डिवाइडर से टकराने से मौत हो गई। हादसे से उनके परिवारों में कोहराम मच गया। 
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रंजीत और अंकित शर्मा का फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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बदायूं के उसावां कस्बे के वार्ड एक के गूरा बाइपास निवासी अंकित शर्मा उर्फ नरेंद्र (30) पुत्र श्यामबाबू और मंगल बाजार निवासी रंजीत सिंह (25) पुत्र नेकपाल सिंह शनिवार शाम पांच बजे एक ही बाइक से हरिद्वार रवाना हुए। बिजनौर जिले के मंडावली थाना क्षेत्र में हरिद्वार-काशीपुर हाईवे पर भागूवाला के पास रात करीब पौने दो बजे उनकी बाइक डिवाइडर से टकरा गई। इससे दोनों की मौके पर मौत हो गई। 

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रंजीत की ससुराल हरिद्वार में ही है। तीन दिन पहले अपने ससुर नरपल से हरिद्वार पहुंचने की बात कही थी। जाते समय दोस्त अंकित को भी अपने साथ ले लिया। घटना के कुछ देर बाद पहुंची पुलिस ने घटना में टूटे मृतक रंजीत के मोबाइल फोन का सिम निकालकर परिजनों से संपर्क किया। हादसे की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। 

परिवार में मचा कोहराम 
गूरा बाइपास निवासी अंकित शर्मा उर्फ नरेंद्र (30) पिता के साथ कारपेंटर का काम करते थे। वहीं, मंगल बाजार के रहने वाले रंजीत सिंह (25) अपने भाइयों के साथ राजमिस्त्री का काम करते थे। अंकित के छोटे भाई अंकुल ने बताया कि रविवार सुबह चार बजे बिजनौर पुलिस ने उन्हें हादसे की जानकारी दी। सूचना मिलते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया। दोनों युवकों के परिजन बिजनौर के लिए रवाना हो गए। 

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मृतक अंकित दो भाइयों में बड़े थे। उनकी दो बेटियां मिष्ठी (8) और श्रेष्ठी (3) हैं। घटना के बाद से पत्नी नीतू का रो-रोकर हाल बेहाल है। वह कई बार गश खाकर गिर गईं। वहीं, मृतक रंजीत के बड़े भाई राजेश उर्फ महाराज ने बताया तीन भाइयों में रंजीत सबसे छोटे थे। उनकी दो बेटी वैष्णवी (4) और शीतल (2) है। रंजीत की मौत की खबर सुनते ही पत्नी सविता बेहोश हो गई। 

बेटे की चाहत में जल लाने गए दोनों युवक
दोनों युवकों के बेटे नहीं हैं। परिजनों के लोगों ने बताया कि बेटे की चाहत में दोनों ने हरिद्वार से जल लाकर शिव मंदिर पटना देवकली पर चढ़ाने की मनौती मानी थी। ईश्वर को न जाने क्या मंजूर था कि उनकी मनौती पूरी नहीं हुई और उनकी जीवन लीला ही समाप्त हो गई।
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